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World Tribal Day 2022: जल,जंगल,जमींन पर खुद फैसला लेंगे आदिवासी, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश ने कही बड़ी बात

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ में कई प्रकार के आयोजन हुए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

रायपुर, 09 अगस्त। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ में कई प्रकार के आयोजन हुए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। सीएम हाउस में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आदिम जाति अनुसंधान प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित 'आदि विद्रोह' एवं 44 अन्य पुस्तिकाओं का विमोचन किया। वहीं सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के कार्यक्रम में हिस्सा लाया।

BHUPESH BAGHEL

मंगलवार को सीएम भूपेश बघेल ने रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के कार्यक्रम में हिस्सा लिया इस दौरान सीएम भूपेश बघेल ने कहा है कि पेसा कानून पहले से अस्तित्व में था, लेकिन इसके नियम नहीं बनने के कारण इसका फायदा आदिवासियों को नहीं मिल पा रहा था,लेकिन अब छत्तीसगढ़ में पेसा अधिनियम को लेकर नियम बन चुका है और इसके लिए 8 अगस्त को राजपत्र में प्रकाशन भी किया जा चुका है। इससे आदिवासी अपने जल-जंगल-जमीन के बारे में खुद फैसला ले सकेंगे।

ग्राम सभा के 50 प्रतिशत सदस्य आदिवासी समुदाय से होंगे:सीएम भूपेश
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सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आदिवासियों के हितों को संरक्षण देने के लिए राज्य में पेसा कानून लागू होने से ग्राम सभा का अधिकार बढ़ेगा। नए नियम से ग्राम सभा के 50 प्रतिशत सदस्य आदिवासी समुदाय से होंगे। इस 50 फीसदी में से 25 प्रतिशत महिला सदस्य होंगी। बघेल ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई, आदिवासियों को वन अधिकार के पट्टे दिए गए , जिसके तहत अभी तक 5 लाख पट्टे वन अधिकार दिए जा जा चुके हैं।

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'आदि विद्रोह' एवं 44 अन्य पुस्तकों का विमोचन

इससे पहले सीएम भूपेश बघेल ने निवास कार्यालय में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में आदिम जाति अनुसंधान प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित 'आदि विद्रोह' एवं 44 अन्य पुस्तिकाओं का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में वन अधिकार के प्रति ग्राम सभा जागरुकता अभियान के कैलेण्डर, अभियान गीत तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के वीडियो संदेश का भी विमोचन किया।
छत्तीसगढ़ के आदिमजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान द्वारा भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रृंखला में और विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से आदिवासी जनजीवन से संबद्ध विभिन्न आयामों को अभिलेखीकृत करने का काम किया गया है, संस्थान द्वारा 44 पुस्तकें प्रकाशित की गई है।

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जल-जंगल-जमीन शोषण, उत्पीड़न से रक्षा एवं भारतीय स्वतंत्रता के लिए समय-समय पर आदिवासियों द्वारा किये गये विद्रोहों एवं देश की स्वतंत्रता हेतु विभिन्न आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाने वाली वीर आदिवासी जननायकों की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने आदि विद्रोह छत्तीसगढ़ के आदिवासी विद्रोह एवं स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी जननायक पुस्तिका तैयार की गयी है। इस पुस्तक में 1774 के हलबा विद्रोह से लेकर 1910 के भूमकाल विद्रोह एवं स्वतंत्रता पूर्व तक के विभिन्न आंदोलन जिसमें राज्य के आदिवासी जनजनायकों की भूमिका का वर्णन है।

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