Chhattisgarh: बदले गए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, विष्णुदेव साय की जगह अरुण साव को जिम्मेदारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह ओबीसी वर्ग के बड़े नेता और बिलासपुर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद सांसद अरुण साव को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
रायपुर, 09 अगस्त। छत्तीसगढ़ में आगामी वर्ष 2023 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव होने से पहले भाजपा में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।आदिवासी दिवस के दिन के भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में भाजपा के 4 बार प्रदेश अध्यक्ष रहे वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया है। उनकी जगह ओबीसी वर्ग के बड़े नेता और बिलासपुर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद सांसद अरुण साव को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

रमन सिंह ने कहा था, कई लोगों ने अध्यक्ष बनने के लिए कपड़े भी सिलवा लिए हैं
बीते लम्बे समय से लगातार सवाल उठ रहे थे कि चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष कब बदलेगा। बताया जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ के कई नेताओ से चर्चा के बाद यह फैसला लिया है। हाल में ही में पूर्व सीएम रमन सिंह ने बयान दिया था कि छत्तीसगढ़ में कई लोगों ने अध्यक्ष बनने के लिए कपड़े भी सिलवा लिए हैं। काफी लोगों ने अध्यक्ष बनने के लिए इच्छा पाल रखी है।
उनके इस बयान के बाद से ही सियासी गलियारों में छत्तीसगढ़ में भाजपा नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान धरमलाल कौशिक छत्तीसगढ़ में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे,लेकिन पार्टी की हार के बाद उनको विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी।

2018 के बाद हुआ है दो दफा बदलाव
साल 2018 में चुनावी हार के बाद सांसद और आदिवासी नेता विक्रम उसेंडी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। उसेंडी लगभग एक साल ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहे। .उसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें हटाकर 2020 में विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ बीजेपी की कमान सौंप दी थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेंस ने 68 सीटों पर कब्ज़ा जमकर बहुमत हासिल किया था,जबकि 15 साल तक छत्तीसगढ़की सत्ता पर काबिज रही बीजेपी को केवल 15 सीटें मिली थीं। इस करारी हार के बाद भी कांग्रेस के सामने भाजपा कमजोर होती गई और कई उपचुनाव में भी अपनी सीटें गंवा दी।

RSS कैडर से आते हैं अरुण साव, ओबीसी वर्ग के हैं बड़े नेता
छत्तीसगढ़ में भाजपा के नए बॉस बिलासपुर सांसद अरुण साव है। आरएसएस कैडर से आने वाले अरुण साव ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली दफा बिलासपुर सीट से चुनाव जीता था। यह बात साफ़ है कि छत्तीसगढ़ में जातीय समीकरण को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने भाजपा संगठन ने बड़ा फेरबदल किया है। पिछड़ा वर्ग से आने वाले अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर देकर बीजेपी ओबीसी वोटरों को साधने की कोशिश में है।
बीजेपी छत्तीसगढ़ के पांचों संभाग में सबसे अधिक मजबूत बिलासपुर संभाग में है। छत्तीसगढ़ में भाजपा को अगर प्रदेश के सबसे बड़े ओबीसी नेता बी चुके मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को टक्कर देनी है,तो ओबीसी वर्ग को साधना पड़ेगा,क्योंकि छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक आबादी पिछड़ा वर्ग की ही है।

अजय जामवाल की रिपोर्ट बनी वजह
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय आदिवासी वर्ग के नेता हैं,जबकि कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ओबीसी वर्ग के नेता हैं और प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम वर्ग से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस में जातिगत समीकरण भाजपा की तुलना में बेहतर जान पड़ रहे थे।
बताया जा रहा है कि जब से बीजेपी ने क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में अजय जामवाल की नियुक्ति हुई है।वह भाजपा में जरुरी बदलाव को तवज्जो दे रहे हैं। रायपुर में हाल ही में आयोजित हुई 3 दिन में प्रदेश पदाधिकारियों, कोर ग्रुप और विधायक दल की मीटिंग के पश्चात एक रिपोर्ट केंद्रीय संगठन को सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के के आधार पर विष्णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष पद से मुक्त करने का फैसला लिया गया।
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