छत्तीसगढ़ आरक्षण विधेयक पर घमासान जारी, अब राजभवन की तरफ से जारी किया गया स्पष्टीकरण पत्र
राजभवन की ओर से चार पन्नों का जवाब जारी किया है। जिसमें राजभवन और राज्यपाल के विरूद्ध बयानबाजी को स्तरहीन बताया गया है।

Chhattisgarh Reservation Bill: छत्तीसगढ़ में आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बवाल जारी है। ऐसे में अब बुधवार को राजभवन की तरफ से स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित होने के बाद आरक्षण विधेयक को लेकर सियासत बयानबाजी हो रही है। विधेयक को विधानसभा में पारित हुए 25 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं अब राजभवन की ओर से चार पन्नों का जवाब जारी किया है। जिसमें राजभवन और राज्यपाल के विरूद्ध बयानबाजी को स्तरहीन बताया गया है।
अपने जवाब में पत्र के माध्यम से राजभवन ने विधिक सलाहकार के विरुद्ध टिप्पणी के संबंध में कहा कि राजभवन के विधिक सलाहकार जो कि न्यायिक सेवा के जिला जज स्तर के हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त होते हैं, उनके विरुद्ध टिप्पणी करना, राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के बारे में बोलना उपयुक्त नहीं है। साथ ही सरकार की ओर से दिए गए जवाबों पर राजभवन ने कहा कि सरकार ने राजभवन की ओर से मांगे गए बिंदुओं पर जानकारी नहीं दी है।
पत्र में बताया गया कि कहा जा रहा है कि क्वाटिफाइल आयोग की रिपोर्ट राजभवन को प्रस्तुत कर दी गई है, जबकि ऐसी कोई रिपोर्ट राजभवन को नहीं दी गई है।
राजभवन ने इन 10 बिन्दु की जानकारी मांगी थी सरकार से
- मात्रात्मक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। विशेष एवं बाध्यकारी परिस्थितियों को नहीं बताया गया है।जिसके अनुसार आरक्षण का प्रतिशत 50 से अधिक हो सकता है,
- कोई विशेष परिस्थितियों का उल्लेख पत्रों में नहीं किया है, जो 19.09.2022 के लगभग ढाई माह उपरान्त उत्पन्न हुई थी और न ही विशेष परिस्थितियों के संबंध में किसी डाटा को प्रस्तुत किया है।
- ऐसा कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया है कि राज्य के ST, SC व्यक्ति किस प्रकार से सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
- छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ापन को ज्ञात करने के लिए किसी कमेटी के गठन की जानकारी प्रेषित नहीं की है और न ही ऐसी कोई रिर्पोट प्रस्तुत की है।
- क्वांटिफाइबल डाटा आयोग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की गई, संशोधित अधिनियम के संबंध में शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अभिमत को प्रेषित नहीं किया गया है।
- सा.प्र.वि. के विशेष सचिव ने यह स्वीकार किया है कि राज्यपाल के अनुमोदन उपरान्त आरक्षण संशोधन विधेयक 2022 छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियाँ अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 कहलायेगा
- किन विधि अनुसार यह संभव नहीं है अर्थात् जब तक विधान सभा द्वारा उक्त अधिनियम, 1994 के शीर्षक में भी संशोधन नहीं किया जाता है तब तक अधिनियम का नाम माननीय राज्यपाल के अनुमोदन के पश्चात् भी परिवर्तित नहीं होगा, कोई सूचना नहीं दी गई है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्य राज्य की सेवाओं में क्यों चयनित नहीं हो रहे हैं।
- पत्रों के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 335 के परिप्रेक्ष्य में यह सूचित ही नहीं किया है कि 72 प्रतिशत आरक्षण (4 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को छोड़कर) लागू करने पर प्रशासन की दक्षता का ध्यान रखा गया है या नहीं रखा गया है और इस संबंध में कोई सर्वेक्षण किया गया या नहीं किया गया। संदर्भित पत्र के माध्यम से ऐसी कोई सर्वेक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की गई है।












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