Chhattisgarh पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य के खिलाफ 7 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल, करोड़ों का है चक्कर?
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में कथित 2,100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले ने एक नया मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को रायपुर की एक विशेष अदालत में 7,039 पेजों की पूरक अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) दाखिल की, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे और व्यवसायी चैतन्य बघेल को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
ED का दावा है कि चैतन्य ने घोटाले से उत्पन्न 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की 'अपराध की आय' का 'प्रबंधन' किया और इसे अपने रियल एस्टेट जैसे व्यावसायिक उपक्रमों में लगाया। यह घोटाला 2018 से 2023 तक चली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था, जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे।

आरोपपत्र की मुख्य बातें: डिजिटल सबूतों के साथ हार्ड डिस्क जमा
ED के वकील सौरभ कुमार पांडे ने बताया कि यह अभियोजन शिकायत छठे जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दमरुधर चौहान की अदालत में दाखिल की गई। इसमें चैतन्य को घोटाले के मुख्य लाभार्थियों में शामिल बताया गया है। पांडे ने कहा, 'चैतन्य ने राज्य के शराब घोटाले से उत्पन्न 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय को संभाला। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए किया। ED को उनके द्वारा 22 करोड़ रुपये की अपराध आय के इस्तेमाल के ठोस सबूत मिले हैं।' आरोपपत्र के साथ डिजिटल साक्ष्य और अन्य सबूतों वाली एक हार्ड डिस्क भी जमा की गई है।
ED के अनुसार, चैतन्य ने 16.7 करोड़ रुपये की आपराधिक आय प्राप्त की, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट फर्मों के जरिए लेयरिंग (मिलाई-जुलाई) की। इस पैसे का उपयोग रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के विकास में किया गया। इससे पहले ED ने मार्च 2025 में चैतन्य के परिसरों पर छापेमारी की थी, और जुलाई 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया था। चैतन्य को 18 जुलाई को दुर्ग जिले के भिलाई में उनके घर (जो वे पिता भूपेश बघेल के साथ शेयर करते हैं) से गिरफ्तार किया गया था। यह उनकी जन्मतिथि के दिन हुआ, जिस पर भूपेश बघेल ने PM मोदी को 'बर्थडे गिफ्ट' कहकर तंज कसा था।
घोटाले का बैकग्राउंड: 2,100 करोड़ का नुकसान, शराब सिंडिकेट का खेल
ED का कहना है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी। अवैध शराब बिक्री से कमाई गई कमीशन को 'राज्य के शीर्ष राजनीतिक अधिकारियों के निर्देशों' के अनुसार बांटा गया। इससे राज्य के खजाने को 2,100 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 2,161 करोड़ या 3,200 करोड़) का भारी नुकसान हुआ, जबकि शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भर गईं। छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW)/ACB ने जनवरी 2023 में FIR दर्ज की थी, जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड समेत 70 लोग और कंपनियां नामजद थीं।
ED ने इस मामले में अब तक तीन अभियोजन शिकायतें दाखिल की हैं, और यह चौथी है। जनवरी 2025 में ED ने कवासी लखमा, अनवर ढेबर (घोटाले के कथित मास्टरमाइंड), पूर्व IAS अनिल टुटेजा, ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था। हाल ही में EOW ने 22 आबकारी अधिकारियों को सस्पेंड किया है। ED का दावा है कि घोटाले में एक 'पैरलल एक्साइज डिपार्टमेंट' चलाया गया, जहां शराब बिना सरकारी ड्यूटी चुकाए बेची जाती थी।
भूपेश बघेल का पलटवार: राजनीतिक साजिश, कोयला घोटाले से ध्यान भटकाने की कोशिश
पूर्व CM भूपेश बघेल ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए हो रहा है। बघेल ने दावा किया कि उनके बेटे के खिलाफ यह एक्शन छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों के लिए 'अवैध पेड़ कटाई' मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए किया गया, जिसे कांग्रेस विधानसभा में उठाने वाली थी। उन्होंने कहा, 'मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, और हम जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन यह साजिश है।' जुलाई में गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने राज्यव्यापी 'चक्का जाम' प्रदर्शन किया था।
राजनीतिक तूल: कांग्रेस vs BJP, जांच जारी
यह मामला अब छत्तीसगढ़ की राजनीति का हॉट टॉपिक बन गया है। BJP ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस इसे 'मोदी सरकार की साजिश' बता रही है। ED की जांच जारी है, और विशेष अदालत में चैतन्य की गिरफ्तारी को लेकर सुनवाई हो रही है। क्या यह घोटाला और बड़े खुलासे लाएगा? या राजनीतिक ड्रामा साबित होगा? अपडेट्स के लिए बने रहें।
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