Chhattisgarh: भरथरी कला के युग का अंत, अमृता बारले के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़, नम आंखों से दी गई विदाई
Amrita Barle: छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक कलाकार अमृता बारले के निधन से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। लोक गायिका अमृता बारले ने भरथरी और पंथी कलाकार थी। उन्हें मिनीमाता राज्य अलंकरण और राष्ट्रपति से सम्मनित किया जा चुका था। सीएम भूपेश बघेल समेत राज्य के सभा प्रमुख नेताओं ने अमृता बारले के निधन पर शोक जताया है।शनिवार को दुर्ग में उनका अंतिम संस्कार हुआ, तो उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।

कुछ दिनों पहले ही अमृता बारले का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया था, जिसके बाद उनको शंकराचार्य हॉस्पिटल जुनवानी, भिलाई के आईसीयू में उन्हें भर्ती करवाया गया था। 12 अक्टूबर 2023 को शाम लगभग 4 बजे अमृता बारले का निधन हो गया। आज सुबह दुर्ग निवासी अमृता बारले के आशीष नगर स्थित आवास में कला जगत से जुड़े लोग कई जनप्रतिनिधि औरउन्हें श्रद्धांजलि अर्पित देने पहुंचे। इस दौरान दुर्ग के सांसद विजय बघेल भी दिवंगत गायिका की अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। रिसाली मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार की प्रकिया पूर्ण की गई।
ज्ञात हो कि 65 वर्ष की अमृता बारले बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रहीं थी। अमृता बारले का जन्म सन् 2 मई 1958 में छत्तीसगढ़ के ग्राम बठेना, विकासखंड पाटन, जिला दुर्ग में हुआ था। उन्होंने केवल 9 वर्ष की आयु से कला साधना शुरू कर दी थी। उन्होंने अंचल के वरिष्ठ लोक गायक बैतल राम साहू के साथ कई लोकगीत गए, जिसमें तोला बंदत हंव बाबा, जय सतनाम, चंदैनी तर्ज कइसे करों मैं मया के बखान जैसे गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
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