दंतेवाड़ाः 250 किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंची सात साल की बच्ची, 50 बच्चे घर लौटे
दंतेवाड़ा। कोरोना वायरस के बढ़ते असर को रोकने के लिए सरकार ने तीन मई तक की अवधि बढ़ा दी गई थी। इस दौरान कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिको देखकर हम सभी का दिल पसीज गया। मजदूर वर्ग के लोग जिनकार रोजगार लॉकडाउन के चलते नहीं रहा वो घर लौटने के लिए बेताब हैं। इसके लिए वो हजारों किलोमीटर पैदल चलकर आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है दंतेवाड़ा से, जहां 50 बच्चे करीब 250 किलोमीटर बैदल चलकर बस्तर लौटे हैं और हैरान कर देने वाली बात यह है कि इन बच्चों में एक सात साल की बच्ची भी है।

12 साल की जमलो घर से 14 किलोमीटर पहल ही तोड़ दिया दम
बता दें कि कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ की 12 साल की बच्ची जमलो मडगाम की मौत हो गई थी। यह बच्ची बीजापुर के आदेड गांव से रोजगार की खोजबीन में तेलंगाना के पेरूर गांव गई हुई थी। बच्ची ने करीब दो महीने तक वहां मिर्च तोड़ने का काम किया। फिर लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया। रोजगार छिनने के चलते रहने-खाने का संकट आ गया। अंत में जमलो गांव के 11 लोगों के साथ तेलंगाना से बीजापुर पैदल ही रवाना हो गई।

50 बच्चे तेलंगाना से घर लौटे
वो लगातार तीन दिन तक करीब 100 किलोमीटर पैदल चलकर छत्तीसगढ़ के बीजापुर के मोदकपाल इलाके में पहुंची। मासूम जमलो अपने घर से केवल 14 किलोमीटर दूर थी तभी वो डिहाइड्रेशन का शिकार हो गई और उसकी मौत हो गई। मृतक बच्ची जमलो मडगाम के झोले से 13 हजार 500 रुपये मिले। ये पैसे बच्ची के कमाई के थे, जिसे लेकर वह घर भी नहीं पहुंच पाई। दंतेवाड़ा में कम से कम 50 बच्चे हैं, जो रोजगार की खोजबीन में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश गए हुए थे।

मां के साथ पहुंची गांव
लॉकडाउन के बाद सभी का रोजगार छिन गया। जो थोड़े पैसे कमाए थे। इसके बाद सभी बच्चे पहाड़ी रास्तों पर पैदल निकल पड़े ताकि घर पहुंच सके। आंध्रप्रदेश से बस्तर लौटने वालों में सात साल की जोगा भी शामिल है। यह मासूम बच्ची अपनी मां के साथ 250 किलोमीटर पैदल चली है। जोगा का परिवार दो दिन पूर्व ही ककड़ी गांव पहुंचा है।












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