CG News: शदाणी दरबार में ज्ञानवर्धक शिविर का आयोजन, बीजेपी नेता अमित चिमनानी ने जगाया राष्ट्र सर्वोपरि का भाव
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल सनातन संस्कृति के केंद्र पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में ज्ञानवर्धक शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर 19 मई से प्रारंभ होकर 2 जून तक चलेगा, जो तीर्थस्थल के पीठाधीश युधिष्ठिर लाल महाराज की अगुवाई में लगातार 15 साल से हो रहा है। इस आयोजन में माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन दिन भारत की संस्कृति, वैदिक ,धार्मिक ज्ञान मोटिवेशनल टिप्स दिए जा रहे हैं।
अब तक यहां 5 हजार से ज्यादा बच्चो को ट्रेन किया जा चुका है। ज्ञानवर्धक शिविर में बच्चों को रविवार को "राष्ट्र सर्वोपरि" विषय पर जानकारी देकर उनमे देश के प्रति चैतन्यता को विकसित किया गया। इस विषय पर भाजपा नेता,चार्टर्ड अकाउंटेंट और मोटिवेशनल स्पीकर अमित चिमनानी रहे। इस दौरान कार्यक्रम में शदाणी दरबार तीर्थ के पीठाधीश संत युधिष्ठिर लाल महाराज, दर्शन निहाल ,शिविर संचालक चंद्रभान गाबड़ा सहित सैकड़ों बच्चो के साथ समाजसेवी मौजूद थे।

अमित चिमनानी ने बच्चों से बात करते हुए बताया कि राष्ट्र सर्वोपरि की भावना समझने पहले राष्ट्र शब्द के अर्थ को समझना होगा। अक्सर देश और राष्ट्र को एक ही शब्द समझा जाता है जबकि ऐसा नहीं है देश एक भौगोलिक क्षेत्र है, जो मान्यता प्राप्त होता है जिसके अपने अलग नियम कानून होते हैं। जहां अलग-अलग धर्म जाति संप्रदाय ,बोली भाषा के लोग रहते हैं। राष्ट्र वह है जो किसी भी देश में रहने वाले लोगों को जोड़ता है, एक आधार से जोड़ता है एक भावना से जोड़ता है। राष्ट्र की बात करते समय उस देश की संस्कृति ,उसकी मूल भावना ,उसके इतिहास, वहां रहने वाले, लोगों की भावना को प्राथमिकता दी जाती है।

कई बार निजी त्याग भी करना पड़ता है
अमित चिमनानी ने बच्चों को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का एक हिस्सा सुनाते हुए कहा कि राष्ट्र को सर्वोपरि रखने कई बार स्व:हित को त्यागना पड़ता, कई बार बहुत कुछ खोना भी पड़ता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति रहते हुए एक बार अपने परिवार के सदस्यों को राष्ट्रपति भवन बुलाया। जहां उनके परिवार के लोग 8 दिन तक रहे उनके जाने के बाद पूर्व राष्ट्रपति ने 3 लाख 52 हजार रुपए का चेक राष्ट्रपति भवन को सौंपा था और जब उनसे सवाल किया गया कि आपने ऐसा क्यों किया, वो तो आपका परिवार ही है। ऐसा नहीं करते तो भी कोई दिक्कत नही थी,तब उन्होंने कहा कि सरकार मेरा खर्चा तो उठाती है,लेकिन मेरे परिवार का नहीं। राष्ट्र के प्रति ऐसा भाव ही राष्ट्र सर्वोपरि की भावना को जन्म देता है। हम सभी को ऐसे किस्सों से सीख लेनी चाहिए।
अमित चिमनानी ने कहा राष्ट्र को सर्वोपरि रखने खुद में राष्ट्र के प्रति भाव जगाकर कार्य करने के साथ साथ जो लोग,संस्थाएं,राजनीतिक दल राष्ट्र को सर्वोपरि मान रहे है उसका खुला समर्थन करना चाहिए। उनकी बातो को जन जन तक पहुंचाने प्रयास करना चाहिए,क्योंकि राष्ट्र हित स्वयं अच्छे कार्य करने के साथ साथ अन्य राष्ट्रवादियों द्वारा किए कार्यों से प्रेरणा लेने और उनके कार्यों को सभी तक पहुंचाने में भी निहित है।

अमित चिमनानी ने कहा कि भारत का युवा इस बात को सुनिश्चित कर चुका है की वह भारत के खिलाफ कोई बात नही सुनेगा और ऐसा करने वालो का कड़ा विरोध करेगा।राष्ट्र सर्वोपरि रखने वालो के लिए यह भी एक प्राथमिकता है की अपने राष्ट्र को झुकाने वाला कोई कार्य न करे। साथ ही राष्ट्र के खिलाफ साजिश रचने वाले और भारत के स्वाभिमान को चोट करने वालो को करारा जवाब देना सीखे क्योंकि हमारे लिए हम बाद में हैं। हमारा देश पहले है।
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