Pure Petrol और E10 मिलेगा या नहीं? अब सरकार ने दिया जवाब, E20 फ्यूल को क्यों बताया बेहतर-साफ?

अगर आप भी अपनी गाड़ी के लिए बिना एथेनॉल वाला सादा पेट्रोल या फिर E10 फ्यूल ढूंढ रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश के पेट्रोल पंपों पर सादा पेट्रोल (Pure Petrol), E10 और E20 तीनों एक साथ बेचना मुमकिन नहीं है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को एक नोट जारी कर साफ किया कि देश में E20 (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) ही स्टैंडर्ड फ्यूल बना रहेगा। सरकार ने साफ कहा है कि अलग-अलग तरह के पेट्रोल ग्रेड रखने से न सिर्फ लॉजिस्टिक्स का खर्च आसमान छूने लगेगा, बल्कि पूरा सप्लाई चेन नेटवर्क भी डगमगा जाएगा।

E20 Petrol Pure Petrol India

असल में कई वाहन मालिकों ने सवाल उठाए कि जब कुछ देशों में शुद्ध पेट्रोल और अलग-अलग ब्लेंड वाले फ्यूल का ऑप्शन है तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। जिसके बाद सरकार ने साफ कर दिया है कि देशभर में एक साथ सादा पेट्रोल, E10 और E20 तीनों तरह का पेट्रोल एक साथ नहीं मिलेगा। पेट्रोल पंप पर फिलहाल E20 ही भारत का स्टैंडर्ड पेट्रोल रहेगा। साथ में सरकार ने यह भी बताया है कि आखिर E20 फ्यूल को क्यों बताया बेहतर और साफ है।

सरकार ने Pure Petrol से क्यों किया इनकार?

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 10 जुलाई को जारी अपने FAQ में कहा कि भारत का फ्यूल नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में शामिल है। देश में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप, टर्मिनल, रिफाइनरी, डिपो, पाइपलाइन और स्टोरेज सिस्टम जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर तीन अलग-अलग ग्रेड का पेट्रोल रखा जाए, तो हर स्तर पर अलग स्टोरेज, सप्लाई और इन्वेंट्री मैनेजमेंट की जरूरत पड़ेगी। सरकार का कहना है कि इससे न सिर्फ खर्च बढ़ेगा, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की एफिशिएंसी कम होगी।

मंत्रालय ने कहा, अगर हर पंप पर तीन अलग-अलग तरह के बेस पेट्रोल रखे जाने लगे, तो सबके लिए अलग स्टोरेज टैंक, अलग पाइपलाइन और अलग इन्वेंट्री मैनेजमेंट की जरूरत पड़ेगी। इससे तेल कंपनियों का मैनेजमेंट खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और काम करने की रफ्तार धीमी हो जाएगी।

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Premium Petrol से तुलना क्यों गलत?

कई लोगों का सवाल था कि जब प्रीमियम पेट्रोल अलग से बिक सकता है, तो Pure Petrol क्यों नहीं। इस पर मंत्रालय ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल सीमित मात्रा में बिकने वाला खास प्रोडक्ट है। उसके लिए पूरे देश में अलग सप्लाई सिस्टम तैयार नहीं करना पड़ता। जबकि Pure Petrol, E10 और E20 को साथ चलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पूरी वितरण व्यवस्था बदलनी पड़ेगी।

E20 पर सरकार का दावा क्या है?

सरकार ने माना कि कुछ पुराने वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर माइलेज में करीब 3 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। लेकिन मंत्रालय का कहना है कि इसके बदले कई बड़े फायदे मिलते हैं। सरकार के मुताबिक E20 में बेहतर ऑक्टेन रेटिंग होती है, इंजन में नॉकिंग कम होती है, दहन तेजी से होता है, पिकअप बेहतर मिलता है, एक्सेलेरेशन स्मूद रहता है और इंजन अपेक्षाकृत साफ रहता है। मंत्रालय ने इसे कम प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन भी बताया।

मंत्रालय ने कहा कि भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए डिस्टिलरी, स्टोरेज फैसिलिटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर सहित इथेनॉल प्रोडक्शन में काफी इन्वेस्टमेंट किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि स्टैंडर्ड पेट्रोल ब्लेंड के तौर पर E10 पर वापस जाने से इथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा और किसानों, कोऑपरेटिव, कंपनियों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के इन्वेस्टमेंट पर असर पड़ सकता है।

मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत ने नवंबर 2025 और जून 2026 के बीच एवरेज 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल की, जबकि पिछले इथेनॉल सप्लाई साल में यह 19.2 परसेंट थी। सरकार का कहना है कि E20 का फैसला अचानक नहीं लिया गया। इसकी रोडमैप 2021 से सार्वजनिक था और ऑटोमोबाइल उद्योग को हर चरण में शामिल किया गया था। E10 लक्ष्य जून 2022 में हासिल किया गया और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से E20 लागू किया गया।

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इंजन खराब होने के दावों पर क्या बोली सरकार?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक E20 को लेकर सबसे बड़ी चिंता इंजन और रबर पार्ट्स को नुकसान पहुंचने की रही है। इस पर मंत्रालय ने कहा कि E20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, टेस्टिंग एजेंसियों और रिसर्च संस्थानों के साथ लंबी प्रक्रिया अपनाई गई थी।

मंत्रालय ने दावा किया कि मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ पुराने वाहन भी शामिल थे। कंपनी ने E20 की वजह से किसी असामान्य जंग, इंजन खराबी या पार्ट्स के जल्दी घिसने जैसी समस्या की पुष्टि नहीं की। Hero MotoCorp ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया है। सरकार का तर्क है कि अगर E20 से वास्तव में बड़े स्तर पर नुकसान होता, तो लाखों वारंटी क्लेम और शिकायतें सामने आतीं, जो अब तक नहीं हुई हैं।

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