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Chhattisgarh: बीजापुर में माओवादियों ने BJP नेता कुडियाम माडो की हत्या की, पुलिस का मुखबिर होने का लगाया आरोप

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी हिंसा ने एक और भाजपा नेता की जान ले ली। बीजापुर जिले के सोमनापल्ली गांव में मंगलवार रात 35 वर्षीय कुडियाम माडो की माओवादियों द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई। भारतीय जनता किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रहे माडो को उनके घर से जबरन ले जाकर निशाना बनाया गया।

पुलिस के मुखबिर होने का आरोप

पुलिस के अनुसार हमलावरों ने माडो पर पुलिस के लिए मुखबिर के रूप में काम करने का आरोप लगाया। घटनास्थल पर मिले एक पर्चे में सीपीआई की बीजापुर नेशनल पार्क एरिया कमेटी ने इस आरोप का उल्लेख किया और इस क्रूर कार्रवाई को न्यायोचित ठहराने का प्रयास किया। फरसेगढ़ पुलिस ने माडो का शव बरामद कर लिया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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भाजपा नेताओं पर हमलों का सिलसिला

कुडियाम माडो की हत्या बस्तर संभाग में भाजपा नेताओं पर बढ़ते हमलों की एक कड़ी है। इस क्षेत्र में माओवादी हिंसा के चलते जनवरी 2023 से अप्रैल 2024 तक 9 भाजपा नेताओं की हत्या हो चुकी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बस्तर खासकर बीजापुर में भाजपा नेताओं को निशाना बनाए जाने के मामलों की व्यापक जांच की मांग की।

महेश गागड़ा ने कहा कि यह राजनीतिक हिंसा की एक खतरनाक प्रवृत्ति है। भाजपा नेताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। राज्य सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और इन घटनाओं के पीछे के कारणों को उजागर करना चाहिए।

माओवादियों की हिंसा, गंभीर चुनौतियां

बस्तर संभाग विशेष रूप से बीजापुर माओवादी हिंसा से लंबे समय से प्रभावित है। यह क्षेत्र न केवल राजनीतिक स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बल्कि यहां के नेताओं और नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में है। साल 2024 में अब तक 60 से अधिक लोग माओवादी हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

कुडियाम माडो की हत्या ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। स्थानीय समुदायों और भाजपा नेताओं ने इस जघन्य घटना की निंदा करते हुए न्याय और सुरक्षा की मांग की है। वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि यह घटना माओवादी हिंसा के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

बीजापुर पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने का आश्वासन दिया है। फरसेगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। साथ ही इस हत्या की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

बस्तर में शांति की चुनौतियां

कुडियाम माडो की हत्या न केवल बस्तर संभाग में राजनीतिक हिंसा का एक और उदाहरण है। बल्कि इस क्षेत्र में व्याप्त माओवादी समस्या के समाधान की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। भाजपा नेताओं के खिलाफ बढ़ते हमले और माओवादी हिंसा का चक्र यह स्पष्ट करते हैं कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए व्यापक और प्रभावी कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।

माडो की मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि बस्तर जैसे अशांत क्षेत्र में राजनीतिक हस्तियां और सामाजिक कार्यकर्ता कितने सुरक्षित हैं। यह घटना माओवादी हिंसा के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और सरकार की प्रतिबद्धता की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

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