बेमेतरा: इंडियन ओवरसीज़ बैंक में 14 करोड़ का घोटाला, महिला समूह और किसानों के नाम पर निकाला फर्जी लोन
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के बाद अब बेमेतरा में बैंक घोटाले का मामला सामने आया है। इस बार बैंक मैनेजर ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर इंडियन ओवरसीज बैंक में 14 करोड़ रुपए घोटाला किया है।
बेमेतरा, 21 अगस्त। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के बाद अब बेमेतरा में बैंक घोटाले का मामला सामने आया है। इस बार बैंक मैनेजर ने अपने स्टाफ के साथ मिलकर इंडियन ओवरसीज़ बैंक में 14 करोड़ रुपए घोटाला किया है। पुलिस लोन घोटाले की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। इस घोटाले को बैंक मैनेजर में लोगों को लोन देने के नाम पर अंजाम दिया है।

इस तरह सामनेआया मामला,
दरअसल इस मामले का खुलासा एक ग्रामीण ने किया जब ग्रामीण के पास अचानक बैंक में 4 लाख रुपए के लोन की किस्त जमा करने का नोटिस आया। तब हड़बड़ा कर ग्रामीण ने बैंक प्रबंधन से की जानकारी मांगी। लेकिन बैंक के अधिकारी भी इस बात को लेकर हैरान दिखे। जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। पीड़ित ग्रामीण ने इसकी शिकायत थाने में कर दी।

तत्कालीन ब्रांच मैनेजर ही निकला आरोपी
पुलिस में मामला दर्ज होने पर बैंक का तत्कालीन ब्रांच मैनेजर विनित दास ने ही मुख्य आरोपी निकला, इस मामले में व्यवसाय के लिए लोन दिलाने के नाम पर 180 लोगों के फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक से पैसे निकाले गए हैं यह पैसे यह पैसे 8 मार्च 2019 से 27 अगस्त 2021 तक निकाले गए हैं।बैंक मैनेजर के बताए अनुसार जिन 180 लोगों के नाम लोन पास किया है, उनके नाम के फर्जी दस्तावेज पाए गए हैं।
बैंक ऑडिट में मिला हेरफेर
इस मामले का खुलासा होने के बाद बैंक ऑडिट कराया गया जिसे शुरुआती जांच में बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रुपए निकालने की बात सामने आई जिसके आधार पर ब्रांच मैनेजर विनीत दास को प्रबंधन ने हटा दिया है। इसके इसके बाद पूरे बैंक में 8 मार्च 2021 से 27 अगस्त 2021 तक लोन ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।

सबसे अधिक केसीसी लोन
जांच अधिकारी एएसआई जितेन्द्र कश्यप ने बताया कि लोन घोटाले में सबसे ज्यादा केसीसी लोन लिया गया है। जब बैंक से गठित समिति द्वारा मौके पर जांच करने पहुंची, तो लोन लिए लोगों के नाम से खेत ही नहीं थे। इनमें कई ऐसे हैं, जिन्होंने ट्रैक्टर लोन के नाम पर पैसा निकाला गया। लेकिन मौके पर जांच में पहुंचने उनके पास न ट्रैक्टर मिला। इसी तरह कोरोना काल के दौरान कई व्यापारियों ने व्यवसाय ठप होने के नाम पर फिर से काम शुरू करने लोन लिया। लेकिन समिति द्वारा जांच की गई, तो उनके नाम पर फर्म ही नहीं मिला। विवेचना अधिकारी ने बताया कि कई लोगों ने फर्जी दस्तावेज जमा कर लोन पास किया गया है। अधिकांश मामले में 10- 20 लाख रुपए का लोन घोटाला हुआ है।

बैंक से फर्जी दस्तावेज बरामद
बैंक मैनेजर के चार अन्य सहयोगी लोन दिलाने के लिए समूह व अन्य लोगों से दस्तावेज लेकर कूटरचना कर बैंक मैनेजर से मिलीभगत कर बैंक पैसे निकालते रहे। इनमें समूह के एक सदस्य भी जालसाजों से मिला हुआ था। इसी तरह जनपद पंचायत बेमेतरा के मछली पालन के लिए 20 लाख व महिला समूहों के नाम पर ओवरसीज बैंक से लोन लेना दिखाया गया है। इनमें एक समूह को 5- 10 लाख रुपए का लोन पास हुआ है।
अपराध दर्ज, मामले की जांच में जुटी पुलिस
घोटाला सामने आने पर मौजूदा ब्रांच मैनेजर रज्जू पाटनवार से बेमेतरा थाने में एफआईआर दर्ज कराया है। टीआई प्रेमप्रकाश
अवधिया ने बताया कि मामले में मास्टर माइंड ब्रांच मैनेजर विनीत दास और 4 अन्य के खिलाफ धारा 420, 409, 120 (बी), 34 के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मास्टर माइंड आरोपी बैंक मैनेजर विनीत दास,अमलीडीह, रायपुर का निवासी है। घोटाला उजागर होने के बाद से आरोपी फरार है। वहीं इस बैंक लोन घोटाले में साथ देने वाले आरोपी कमलेश सिन्हा, सोहन वर्मा, नागेश वर्मा और टीकाराम माथुर भी फरार हैं।












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