बलरामपुर में हाथियों को रोकने महुआ शराब बनाने पर प्रतिबंध, जशपुर में दल से बिछड़कर गांव पहुंचा बच्चा हाथी
बलरामपुर, 16 सितम्बर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में हाथियों की आमद एक बार फिर बढ़ती जा रही है। बलरामपुर के सघन वन वाले क्षेत्र में झारखंड के जंगलों से हाथियों का दल छत्तीसगढ़ पहुंच रहा है। वहीं संभाग के बलरामपुर, जशपुर, सूरजपुर जिले में हथियों का दल उत्पात मचा रहा है। जंगलों से बस्तियों में पहुंचकर हाथियों ने कई घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाया। गांवो तक आने से हाथियों को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से महुआ शराब नही बनाने के निर्देश दिए है।

बलरामपुर स्टेट हाइवे के करीब पहुंचा हाथी दल
लगभग दस हथियों का दल बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सलबा के नजदीक पहुंच गया है। और लगातार नए रास्ते की तलाश कर रहें हैं। स्टेट हाइवे को पार कर हाथी सलबा के कांदाबाड़ी में डेरा जमाए हुए हैं। हाथियों की धमक के बाद सलबा सड़क पर शाम ढलने के बाद आने जाने पर रोक लगा दी गई है। चौकीदार हाथी की सूचना देते हुए ग्रामीणों को वापस लौटा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पिछली बार कांदाबाड़ी में हाथी हफ्तेभर से अधिक रूके थे। कई बार तो हाथी महीने भर यहीं डेरा जमाए रहते हैं। अगर हाथियों का दल हाइवे के नजदीक पहुंचा तो आसपास के गांवो के लिए खतरा बन सकता है।

ग्रामीणों के महुआ शराब बनाने पर प्रतिबंध
गांव से लगे जंगल में हाथी चिंघाड़ रहे हैं, इससे आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं। इधर वन विभाग के अधिकारियों ने बलरामपुर जिले के ग्राम सलबा के ग्रामीणों को महुआ शराब नहीं बनाने के निर्देश दिए है। अफसरों का मानना है कि महुएं की खुशबू से हाथी गांव में पहुंचकर कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल वन क्षेत्र होने के कारण स्टेट हाइवे से लगे सलबा और सकला के ग्रामीण महुआ शराब बनाने का काम करते हैं, इसलिए ग्रामीणों ने भी अब अफसरों की बात मानकर शराब नही बनाने का निणर्य लिया है।

किसानों के फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
सरगुजा संभाग के बलरामपुर और जशपुर के जंगलों में भी हाथियों का आतंक देखा जा रहा है। कुछ हाथी गांवो में घुसकर ग्रामीणों के घरों को नुकसान पहुंचा रहें हैं। ग्राम दुधनिया में खेतों में लगी फसल को जमकर नुकसान पहुंचाया। हाथी की गर्जना से पूरे इलाके में दहशत है। बलरामपुर में हाथी स्टेट हाइवे से सिर्फ डेढ़ किमी ही दूर हैं। फारेस्ट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो दिन पहले ही हाथी दल के आने की सूचना ग्रामीणों को दे दी गई थी। अभी हाथी दल कांदाबाड़ी पहुंचा है।

जशपुर में हाथी का बच्चा अपने दल से बिछड़ा
वन विभाग के अनुसार तपकरा वन परिक्षेत्र में इस समय 33 हाथी है। इनमें शांति और गौतमी हाथी दल शामिल है। समडमा गांव में बीते दिनों ग्रामीणों ने अपने दल से अलग होकर बस्ती के पास भटक रहे एक हाथी के बच्चे को देखा गया। हाथी का एक बच्चा दल से अलग होकर गांव के एक बस्ती में पहुँच गया था। बस्ती के समीप हाथी के बच्चे को घूमता देख ग्रामीणों ने पकड़ लिया। इस दौरान कुछ बच्चे उसके साथ खेलते हुए वीडियो बनाने लगे। लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। बिछड़े हुए हाथी के बच्चे को वन विभाग ने फिर से उनके दल में शामिल करने की कोशिश की लेकिन उनकी कोशिश नाकाम रही।

गांव में वापस आ गया था छोटा हाथी
विभाग के अनुसार हाथी के जिस दल के पास हाथी बच्चे को छोड़ा गया था। हो सकता है उसकी मां उस दल में ना हो। इसलिये हाथियों के दल ने उसे स्वीकार नहीं किया। हाथी के बच्चे को उसके दल से मिलाने के लिए वन विभाग ड्रोन की सहायता से एक दल को समडमा के पास देखा गया है। वन कर्मियों ने एक चार पहिया वाहन की सहायता से जंगल के किनारे ले जा कर छोड़ दिया था। आवाज करता हुआ छोटा हाथी जंगल के अंदर घुस गया था। उसकी आवाज सुनकर दल के हाथियों ने भी आवाज दी थी। इसे सुनकर वन विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली थी।

बिलासपुर सम्भाग के इन जिलों में भी दहशत
सरगुजा संभाग के अलावा बिलासपुर संभाग के कोरबा, गौरेला पेंड्रा, मरवाही और रायगढ़ जिले में हाथी दल जंगल से निकलकर आसपास के गांव की ओर पहुंच रहे हैं। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बीती रात हाथी दल ने एक किसान के खेत में जमकर उत्पात मचाया। जब किसान अपने खेत पहुंचा और वहां का नजारा देखकर रो पड़ा। धरमजयगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सागरपुर में बीती रात जंगली हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। जंगली हाथियों के एक दल ने क्षेत्र के किसान दयाल के मक्के की फसल को बुरी तरह रौंद डाला।












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