Anti-Naxal Operation में सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी सफलता, मारा गया माओवादी कमांडर बसवराजु
Anti-Naxal Operation: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के घने अबूझमाड़ के जंगलों में देश की सुरक्षा बलों ने नक्सली उग्रवाद के खिलाफ सबसे निर्णायक कार्रवाई में इतिहास रच दिया। देश के सबसे वांछित माओवादी सुप्रीम कमांडर नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु को सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया।
बसवराजु सीपीआई (माओवादी) का महासचिव और कई बड़े नक्सल हमले का सरदार रहा है। 1.5 करोड़ रुपये के इनामी बसवराजु की मौत को नक्सल हिंसा के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।

Anti-Naxal Operation: बचपन से बगावत तक: बसवराजु की कहानी
1955 में आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जियन्नापेटा गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे बसवराजु के पिता एक स्कूल शिक्षक थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के क्षेत्रों में लेने के बाद उन्होंने वारंगल के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (अब एनआईटी) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। कॉलेज के दौरान वे रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन और फिर सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वार के संपर्क में आया।
1984 में उन्होंने एमटेक बीच में ही छोड़ दिया और पूरी तरह माओवादी आंदोलन में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार और पूर्व जीवन से सभी संबंध तोड़ दिए।
Anti-Naxal Operation: गुरिल्ला युद्ध का मास्टरमाइंड
1987 में बसवराजु ने श्रीलंका में लिट्टे (LTTE) के साथ गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण लिया और विस्फोटकों तथा जंगल युद्ध में विशेषज्ञता हासिल की। समय के साथ उन्होंने खुद को एक रणनीतिकार और माओवादी हिंसा के मुख्य योजनाकार के रूप में स्थापित कर लिया।
प्रमुख हमलों में शामिल हैं:
- 2010 दंतेवाड़ा नरसंहार: जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए।
- 2013 जीरम घाटी हमला: जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा समेत 27 लोगों की मौत हुई।
- 2003 अलिपिरी ब्लास्ट: आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर असफल हमला।
- 2018 अराकू घाटी हत्या कांड: टीडीपी विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमा की हत्या।
गणपति के सेवानिवृत्त होने के बाद 2018 में बसवराजु को सीपीआई (माओवादी) का महासचिव और सुप्रीम कमांडर बनाया गया। उन्होंने संगठन की वैचारिक और सैन्य दिशा को नई दिशा दी और लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे।
Anti-Naxal Operation: कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर चल रहा लाल आतंक के खिलाफ ऑपरेशन
बसवराजु की मौत कोई अलग घटना नहीं थी, बल्कि यह एक व्यापक और रणनीतिक अभियान का सबसे बड़ा पड़ाव था। 21 अप्रैल 2025 से शुरू होकर 11 मई तक चले इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में 24 दिनों तक अभियान चलाया। लगभग 1,200 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैले इस ऑपरेशन में 21 मुठभेड़ें हुईं। सुरक्षा बलों ने 450 से अधिक IEDs का सामना किया, जिनमें से 15 फट गए और 18 जवान घायल हुए।
भारी गर्मी और दुर्गम भूभाग के बावजूद जवानों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। एक हेलिपैड और बेस कैंप भी पहाड़ियों पर स्थापित किया गया ताकि निरंतर ऑपरेशन चलाया जा सके।
- 216 माओवादी ठिकाने नष्ट किए गए।
- 35 से अधिक हथियार, जिसमें स्नाइपर राइफल भी शामिल है, बरामद किए गए।
- 4 तकनीकी इकाइयां जो विस्फोटक बनाती थीं, नष्ट की गईं।
- 818 गोले, 899 डेटोनेटर कॉर्ड बंडल, और भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त किया गया।
- मौके से बरामद राशन, दवाइयाँ और दैनिक उपयोग की सामग्री से स्पष्ट है कि यह क्षेत्र माओवादियों का संगठित अड्डा था।
कर्रेगुट्टालु: दो वर्षों से बना था माओवादी किला
60 किमी में फैली कर्रेगुट्टालु की पहाड़ियाँ पिछले ढाई वर्षों से माओवादियों का मजबूत गढ़ बनी हुई थीं, जहाँ करीब 300-350 सशस्त्र कैडर मौजूद थे। ऑपरेशन के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इस गढ़ को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: पीएम मोदी और शाह ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को "अभूतपूर्व सफलता" बताया। पीएम मोदी ने इसे माओवाद के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक क्षण कहा, वहीं शाह ने इसे "राष्ट्रीय गर्व का क्षण" बताते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस की DRG और अन्य बलों की सराहना की।
सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और प्रवक्ता अभय ने एक बयान जारी कर 26 माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि की और शांति वार्ता की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री से सरकार की बातचीत की नीति को स्पष्ट करने की मांग की।
Anti-Naxal Operation:2014 से बदलती रणनीति: ऑपरेशन के साथ विकास भी
2014 के बाद से सरकार ने नक्सल क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास दोनों पर समान रूप से काम किया है:
- माओवादी प्रभावित जिले 76 से घटकर 42 रह गए हैं।
- सुरक्षा बलों की शहादत 2014 में 88 से घटकर 2024 में 19 रह गई।
- 928 नक्सलियों ने 2024 में आत्मसमर्पण किया, और 2025 के पहले चार महीनों में 700 से अधिक ने हथियार डाले।
- 320 से अधिक सुरक्षा कैंप और 68 नाइट-लैंडिंग हेलिपैड बनाए गए हैं।
- सड़कों, स्कूलों, और मोबाइल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है।
वित्तीय नेटवर्क पर भी करारी चोट
NIA और राज्य एजेंसियों ने माओवादी फंडिंग पर भी कार्रवाई की है। साथ ही बच्चों की भर्ती कर उन्हें "बाल संघम" और "चेतना नाट्य मंडली" जैसे संगठनों में लड़ाका बनाने की माओवादी रणनीति की कड़ी निंदा की गई है।
Anti-Naxal Operation 2026 तक लक्ष्य: माओवादी समाप्ति
अब माओवादी कमांड ढांचा बिखर चुका है और बचे हुए नेता छोटे-छोटे समूहों में काम कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य 2025 के अंत तक शेष नेतृत्व का खात्मा या आत्मसमर्पण सुनिश्चित करना है, ताकि 2026 तक देश को पूरी तरह माओवादी हिंसा से मुक्त किया जा सके।
छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा, "इस ऑपरेशन ने माओवाद की अजेयता की मिथक को तोड़ दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक विजय है जो देश के हृदय में नई आशा का संचार करती है।"
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