छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर पर क्यों मचा है सियासी घमासान? विपक्ष के आरोपों पर डिप्टी CM अरुण साव ने दिया जवाब
Chhattisgarh Mahtari: छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव का समापन हो गया है, लेकिन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर न होने को लेकर राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर राज्य के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और उप मुख्यमंत्री अरुण साव आमने-सामने हैं।
कांग्रेस ने राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर का अपमान होने का आरोप लगाया, वहीं भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान को बढ़ावा देने का कार्य किया है।
महंत का हमला: "जिनकी सेवा कर रहे हैं, उनकी तस्वीर नहीं"
डॉ. चरणदास महंत ने मीडिया से बात करते हुए भाजपा पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी की इज्जत नहीं है। जिनकी सेवा कर रहे हैं, उनकी तस्वीर ही कार्यक्रम में नहीं थी।" महंत ने राज्य सरकार के धार्मिक एजेंडे पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करते हुए चुनावों में भाईचारे और एकता के नाम पर वोट मांगना चाहिए, न कि धार्मिक मुद्दों पर।

अरुण साव का पलटवार: "कांग्रेस ने राज्य को बदनाम किया"
इस मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने हमेशा छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान को बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा, "आज देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान बनी है।" उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राज्य को कुपोषण, अशिक्षा, और भुखमरी के कगार पर छोड़ दिया था और उसे भ्रष्टाचार, अपराध और नशे का गढ़ बना दिया था। साव ने कहा, "राज्य का सम्मान बढ़ाने का काम राज्य सरकार कर रही है, और यह काम कांग्रेस से बेहतर कोई नहीं कर सकता।"

राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर न होने को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में तकरार को हवा दी है। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल बना हुआ है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का असली सम्मान किस पार्टी द्वारा किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ महतारी: अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक
"महतारी" शब्द का अर्थ मां होता है, और छत्तीसगढ़ महतारी "भारत माता" का एक रूप मानी जाती हैं। वह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर को राज्य के शासकीय, सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में बड़े सम्मान के साथ लगाया जाता है। यह तस्वीर राज्य की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बन चुकी है।

छत्तीसगढ़ महतारी की पहली तस्वीर
छत्तीसगढ़ महतारी की पहली तस्वीर सन् 1992 में ललित मिश्रा ने बनाई थी। उस समय ललित मिश्रा छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के लिए एक छात्र नेता के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने 'आजाद छत्तीसगढ़ फौज' का गठन भी किया था। जब वे छत्तीसगढ़ को एक अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर जनता के बीच गए, तो उन्हें महसूस हुआ कि लोगों के बीच छत्तीसगढ़ को जीवंत और भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, ताकि लोग इस आंदोलन से जुड़ सकें और इसका समर्थन कर सकें। यही कारण था कि उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर बनाने का विचार किया।
तस्वीर का विकास और बदलाव
आज जिस तस्वीर का सरकार द्वारा उपयोग किया जा रहा है, वह 2017-18 में फोटोशॉप के माध्यम से तैयार की गई थी। इस तस्वीर को कवि और चित्रकार ईश्वर साहू बंधी ने तैयार किया था। इस तस्वीर में छत्तीसगढ़ महतारी की छवि को और भी प्रभावशाली और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
छत्तीसगढ़ महतारी की यह तस्वीर अब राज्य की संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है और यह छत्तीसगढ़वासियों के दिलों में अपनी विशेष जगह बनाए हुए है।












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