5 राज्यो में करारी हार के बाद कांग्रेस पर मंडराया भूपेश सरकार बचाने का खतरा, 2023 के लिए कैसी है तैयारी?
रायपुर, 13 मार्च। यूपी समेत 5 राज्यों के चुनाव परिणाम ने कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। रविवार को कांग्रेस कार्यसमिति यानि सीडब्ल्यूसी की बैठक में हार को लेकर पार्टी ने क्या चिंतन किया और आगे क्या करने वाली है, वह आगे साफ हो जायेगा, लेकिन फिलहाल यह तय है कि कांग्रेस जिस छत्तीसगढ़ मॉडल को चुनावी राज्यों में प्रचारित करती नहीं थकी, उसे जनता ने नकार दिया है। 2023 में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव होने हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अपनी सत्ता बचा पायेगी?
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मध्यप्रदेश, पंजाब में आपसी कलह ने डुबोई कश्ती, छत्तीसगढ़, राजस्थान बचाने की चुनौती
2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में सरकार बनाई। मध्यप्रदेश कांग्रेस के हाथ से निकल गया, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी पूर्ण बहुमत के बावजूद कांग्रेस की अंदरूनी कलह के कारण सियासी ड्रामा कम नहीं हुआ। कमोबेश पंजाब में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की खटास और चुनाव से ठीक पहले बतौर सीएम चन्नी की एंट्री ने जनता के बीच संदेश पहुंचा दिया कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस अब पंजाब से भी सत्ता गंवा बैठी है। ऐसे में अब पार्टी की मुख्य चिंता छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार बचाने को लेकर है।

नहीं चला छत्तीसगढ़ मॉडल का जादू
कांग्रेस ने पंजाब में सत्ता खो दी है, वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी उसे करारी शिकस्त सहनी पड़ी है। कांग्रेस ने इन सभी राज्यों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को स्टार प्रचारक बनाकर भेजा था। उत्तर प्रदेश और असम में तो वह पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक थे। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार की योजनाओं को "छत्तीसगढ़ मॉडल" बताकर खूब प्रचारित किया, साथ ही उसे चुनाव जीतने की सूरत में लागू करने का वादा भी किया। उत्तर प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी, बिजली बिल हाफ, धान पर बोनस खरीदी, गौधन न्याय योजना, नरवा गरवा घुरवा बारी योजना को जमकर प्रचारित किया। हर जगह यह बताने का प्रयास किया गया कि मोदी का गुजरात मॉडल,भूपेश के छत्तीसगढ़ मॉडल के आगे फेल है, लेकिन जनता इन बातों को समझ नहीं सकी।

किसान, धान से हटकर नई रणनीति पर काम करने की जरूरत
चुनावी रण में कांग्रेस एक बार फिर से फिसड्डी साबित हो चुकी है। उसे छत्तीसगढ़ में अपनी सत्ता बचाने के लिए अब काफी मशक्कत करनी पड़ेगी, क्योंकि काफी मेहनत करने के बाद भी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आ रहे हैं, वहीं रणनीतिक तौर पर भाजपा और अन्य दल कांग्रेस से बेहतर साबित हो रहे हैं। इसे खारिज नहीं किया जा सकता कि भूपेश बघेल सरकार ने किसानों की कर्ज माफी और धान पर 2500 रुपये बोनस देकर छत्तीसगढ़ में ग्रामीण जनता के बीच विश्वास अर्जित किया है, लेकिन हाल में आये चुनाव परिणामों ने बता दिया है कि देश भर में हुए बड़े किसान आंदोलन के बावजूद जनता ने 4 राज्यों में भाजपा को ही अवसर दिया है। ऐसे में कांग्रेस को अपनी कुर्सी बचाने के लिए नई रणनीति पर काम करने की जरुरत है।

भूपेश सरकार की योजनाओं के भरोसे ही मैदान में उतरेगी कांग्रेस?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम का स्पष्ट कहना है कि प्रदेश के किसान और मजदूर सरकार की योजनाओं के कारण मिलने वाले लाभ की वजह से कांग्रेस से खुश हैं और यही वजह कांग्रेस को 2023 के चुनाव में भी जीत दिलाएगी। कांग्रेस छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान चला रही है, पार्टी के आला नेताओं का कहना है कि नए सदस्य जनता के बीच भूपेश सरकार की योजनाओं को प्रचारित करके 2023 में एक बार फिर जीत सुनिश्चित करेंगे।
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