नदी में फंसी हथिनी ने सूंड उठाकर 5 घंटे तक मौत को दी मात, जीत गई जिंदगी की जंग
पन्ना टाइगर रिजर्व की हथिनी मोहनकली के प्राण शुक्रवार को संकट में फंस गए। वह मंडला रेंज से निकली केन नदी को पार कर रही थी, इसी दौरान उसके पैर में फंसी जंजीर किसी चट्टान में अटक गई। आकंठ पानी में डूबी हथिनी ने हवा में सूंड उठाकर 5 घंटे तक सांस लेती रही, इस दौरान पीटीआर, एसडीआरएफ की टीम ने उसका सफर रेस्क्यू कर उसकी जान बचा ली।

पन्ना टाइगर रिजर्व में हथिनी मोहनकली के पैर में बंधी लोहे की मोटी जंजीर शुक्रवार को जी का जंजाल बन गई और उसके प्राण उफनती केन नदी की धार में संकट में आ गए। दरअसल मोहनकली मड़ला रेंज में नदी को पार कर रही थी, यह उसके लिए सामान्य बात थी, लेकिन यह क्या उसके पैर की जंजीर किसी चट्टान में जाकर उलझ गई और वह बीच धार में पानी में आकंड डूबी थी, केवल पीठ का 10 फीसदी हिस्सा और सिर बाहर था, अनारकली करीब चार घंटे तक सूंड को हवा में उठाकर सांस लेती रही।
हथिनी के नदी में फंसने की सूचना के बाद पहुंची टीमें
पन्न टाइगर रिजर्व प्रबंधन व हाथी दल को जैसे ही जानकारी लगी तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में टीमें नदी किनारे पहुंची। हथिनी को नदी के तेज बहाव से बाहर निकालने का प्रयास किया गया। पानी का तेज बहाव और जंजीर चट्टान में फंसने के कारण हाथिनी को निकालने में मुश्किल हो रही थी। इसके बाद एसडीआरएफ और होमगार्ड की टीम को बुलवाया गया। करीब 5 घंटे के रेस्क्यू के बाद हथिनी को सुरक्षित नदी से निकाला गया। मौके पर कलेक्टर हरजिंदर सिंह भी पहुंच गए थे।
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टाइगर मॉनिटरिंग और ट्रैंकुलाइज में महत्वपूर्ण हैं हथिनी मोहनकली
पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्तमान में नए-पुराने हाथियों को मिलाकर कुल 17 हाथी हैं। इनमें मोहनकली महत्वपूर्ण है। वह करीब 30 साल की है और 22 साल से पन्ना में हैं। से संजय नेशनल पार्क से यहां लगाया गया था। वह तीन बच्चों को जन्म दे चुकी है। वह पहले पर्यटकों को टाइगर सफारी कराती थी, लेकिन अब अधिकांश टाइगर मॉनीटरिंग और टाइगर को ट्रैंकुलाइज करने में उसकी भूमिका रहती है। उसके अलावा हथिनी अनारकली, रूपकली से भी ऐसे ही काम लिया जाता है।












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