जयललिता के उत्तराधिकारी पर सबकी निगाह, इस नेता के पक्ष में कराए गए हस्ताक्षर
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और AIADMK सुप्रीमो जयललिता की बिगड़ती तबीयत और कई आशंकाओं के बीच उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। इस कड़ी में AIADMK के एक बड़े नेता का नाम सामने आ रहा है।
नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयारमन जयललिता की तबीयत फिर से खराब हो गई है। रविवार रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल की ओर दिल्ली से ब्रिटेन तक के डॉक्टर गए।
इन सबके बीच सोमवार को अपोलो अस्पताल की ओर से जारी किए गए जयललिता के हेल्थ बुलेटिन में स्पष्ट बताया गया कि उनकी हालत बेहद नाजुक है। उन्हें ECMO और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है।

जयललिता का इलाज करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े हृदय रोग विशेषज्ञ ब्रिटिश एक्सपर्ट डॉ. रिचर्ड बेल ने भी सोमवार को कहा कि हम उन्हें वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट देने की कोशिश कर रहे हैं। लगातार उन पर नजर रखी जा रही है।
डॉक्टर बेले के मुताबिक उनकी जांच में वरिष्ठ जानकारों की मल्टीडिसिप्लीनरी टीम लगाई गई है। उनकी सेहत को देखते हुए अब और ज्यादा कॉरपोरल लाइफ सपोर्ट सिस्टम लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि चेन्नई के अपोलो अस्पताल में पहले से विशेष तकनीक के जरिए उनका इलाज किया जा रहा है। इस मौके पर एम्स के डॉक्टरों की टीम मौजूद होने से जाहिर है कि यहां सीएम जयललिता का बेहतर इलाज चल रहा है।

इनके पक्ष में कराए गए हस्ताक्षर
जयललिता की बिगड़ती तबीयत और तमाम आशंकाओं के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विरासत का दावेदार खोजा जा रहा है। इसी कड़ी में सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी के सभी विधायकों से फिलहाल मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाल रहे ओ पन्नीरसेल्वम के पक्ष में हस्ताक्षर कराया गया है।
इससे पहले जब सितंबर में जयललिता अस्पताल में भर्ती हुई थीं तो राज्य के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने ओ पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री पद का कार्यभार सौंपा था।

ये है पन्नीरसेल्वम में खास
आईए आपको बताते हैं कि पन्नीरसेल्वम की खास बातें क्या-क्या है? राज्य के थेनी जिला स्थित पेरियाकुलम के मध्यवर्गीय परिवार से उठ कर राजनीति के इस स्तर पर पहुंचे हैं
बता दें कि एमजीआर और उनकी पार्टी का मजबूत समर्थक रहे पन्नीरसेल्वम का सपना था कि वो पेरियाकुलम नगरपालिका के अध्यक्ष बन जाएं। 1996 में अध्यक्ष बनने के बाद वो धीरे-धीरे सब कुछ हासिल करते गए।

हमेशा रहे जयललिता के साथ
यह उनके लिए भगवान या अम्मा का तोहफा था। जयललिता ने पन्नीरसेल्वम में जो अब तक खास बात ध्यान दी है वो है उनका धैर्य है। इतना ही नहीं पार्टी में वरिष्ठ नेता भी इस बात को मानते हैं कि पन्नीरसेल्वम कभी किसी पद के लिए उग्र नहीं हुए। जब एआईडीएमके के नेताओं ने 1996 में जयललिता की पहली सरकार के बाद एआईडीएमके ज्वाइन किया तो पन्नीरसेल्वम उन कुछ लोगों में से थे जो जयललिता के पीछे खड़े थे।

स्टालिन ने कहा था बेनामी सीएम
कई बार उनके रिश्तेदारों पर भ्रष्टाचार की रिपोर्ट सामने आई जिसके बाद पन्नीरसेल्वम ने कहा था कि वो सब कुछ लौटाने के लिए तैयार हैं जो उनके परिवार ने अम्मा के न रहने पर कमाया है। सन् 2014 में जब पन्नीरसेल्वम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने तो डीएमके नेता एम.के स्टालिन ने उन्हें बेनामी सीएम कहा था।

शपथ ग्रहण के दौरान थे आंखों में आंसू
उन्हें जयललिता का बेनामी बताते हुए स्टालिन ने कहा था कि सीएम पद पर रहते हुए पन्नीरसेल्वम की बेबसी कभी माफ नहीं की जाएगी। स्टालिन ने कहा था कि आपकी ड्यूटी है कि आप तमिलनाडु की जनता की सेवा करें न कि दोषी ठहराए गए अपराधियों (जयललिता और शशिकला) की। पन्नीरसेल्वम उन मंत्रियों में से एक हैं जिनकी आंखो में जयललिता की गैरमौजूदगी में हो रहे शपथ ग्रहण के दौरान आंखों में आंसू थे।

ना कमाण्डर, ना सही बॉस
2 बार सीएम पद के पद पर रहने के बावजूद इस बार पन्नीरसेल्वम के लिए सीएम का पोर्टफोलियो संभालना थोड़ा कठिन हो सकता है। पन्नीरसेल्मावम के मातहत कम करने वाले एक अफसर ने कहा था कि वो न तो बेहतर है बॉस हैं, न कमाण्डर। लेकिन उन्हें व्यवस्था संभालने में कोई दिक्कत नहीं होगी।












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