स्वर्ण पदक हासिल करने वाले मरियप्पन इसलिए मांग रहे हैं हर्जाना
चेन्नई। रियो पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले मरियप्पन थंगावेलू अभी भी वो हादसा नहीं भूले हैं जिसके कारण उनका पैर कट गया था। यह हादसा 15 साल पहले हुआ था।

बचपन में जब मरियप्पन सड़क के किनारे अने दोस्तों के साथ खेल रहे थे उसी वक्त एक बस अपना संतुलन खोते हुए उन पर चढ़ गई थी।
उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनके दाई टांग की सर्जरी भी की गई लेकिन वो सही नहीं हो पाया। मरियप्पन को अपना पैर खोना पड़ा।
कोर्ट का रुख कर चुका है परिवार
2001 में हुए इस हादसे के मामले में मरियप्पन का परिवार पहले ही हर्जाना के लिए कोर्ट का रुख कर चुका है।
मरियप्पन की मां सरोजा के मुताबिक उसे कुछ साल पहले 50,000 रुपए मिले थे। हालांकि परिवार उस राशि को स्वीकार करने से मना करना चाहता था लेकिन गरीबी और पर्याप्त कमाई का कोई साधन न होने के कारण उन्हें यह राशि स्वीकार करना पड़ा।
हालांकि राज्य परिवहन विभाग के कई बार अनुरोध करने पर मरियप्पन ने हर्जाना मिलने के बाद भी मामला वापस नहीं लिया है।
मरियप्पन के कोच सत्यनरायण के अनुसार सरोजा मामला वापस नहीं लेना चाहती। वो भविष्य में और भी हर्जाने का दावा करने के लिए यह मामला जारी रखना चाहती हैं।
कोच को इस बात का भी है दुःख
उनके कोच ने यह जानकारी भी दी कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के निजी सचिव ने उन्हें शनिवार को बुलाया है । निजी सचिव की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार हर तरह की मदद और सहयोग देने को तैयार है।
उनके कोच ने बताया कि अभी भी मरियप्पन अपनी दाईं टांग खोने का दुख नहीं भूल पाए हैं। मरियप्पन अपने परिवार का वह निराशाजनक परिदृश्य नहीं भूल पाए हैं जहां वो और उनके परिवार के 4 सदस्य सलेम स्थित एक छोटे से कमरे में रहते थे।
उनका परिवार हर रोज संघर्ष करता था। इसी कारण से मरियप्पन हर्जाना चाहते हैं।

(मरियप्पन और वरुण)
हालांकि सत्यनारायण इस बात से भी दुखी है कि पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले वरुण भाटी सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दी है।












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