मंदिरों के संचालन में नेताओं के हस्तक्षेप पर भड़के मदुरै मठ के महंत, बोले- इनकी यहां क्या जरूरत?
चेन्नई, 07 जून। मदुरै अधीनम मठ की संपत्ति को लेकर मठ के महंत श्री हरिहर श्री ज्ञानसंबंदा देसिका स्वामीगल ने सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि कोषागार के अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि मंदिर के भीतर क्या चल रहा है। मंदिर को किसी रिटायर्ड जज या फिर गांव के बुजुर्ग की देखरेख में चलाया जाना चाहिए। यहां मंदिर की संपत्ति गुम हो रही है। तमिनाडु की संस्कृति मंदिर के भीतर है। महंत श्री हरिहर ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आखिर मंदिर के भीतर नेताओं की क्या जरूरत है, मंदिर में अहम पदों पर सत्तारूढ़ दल या फिर विपक्ष के नेता होते हैं, आखिर इसकी क्या जरूरत है। मंदिर को रिटायर्ड जज या फिर गांव के बुजुर्ग की देखरेख में चलाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही महंत हरिहर ने लोगों से अपील की है कि वह फिल्म अभिनेता विजय की फिल्म को ना देखें। उन्होंने ऐसी फिल्म में एक्टिंग की है जिसमे हिंदू धर्म की भावनाओं का अपमान किया गया है। बता दें कि पिछले महीने तमिलनाडु की सरकार ने पट्टिना प्रवेशम शोभा यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद मठ के महंत श्री हरिहर और प्रदेश सरकार के बीच तनातनी चल रही है। गौर करने वाली बात है कि इस शोभायात्रा में मदुरैमठ के महंत को पालकी पर बैठाकर शोभा यात्रा को निकाला जाता है, लेकिन पिछले महीने के अंत में प्रदेश सरकार ने इसपर पाबंदी लगा दी थी।
मदुरै मठ मंदिर की बात करें तो यह मंदिर तकरीबन 500 साल पुराना है। महंत ने कहा कि धरमापुरम अधीनम पांच सौ साल पुराना है और यहां पर पिछले 500 साल से ही शोभा यात्रा निकाली जा रही है। सदियों से यह कार्यक्रम चल रहा है। यहां तक कि ब्रिटिश शासन में भी और आजादी के बाद सभी मुख्यमंत्रियों ने इस शोभायात्रा की इजाजत दी थी। पूर्व मुख्यंत्री एम करुणानिधि ने भी शोभा यात्रा की अनुमति दी थी, लेकिन जिस तरह से इस सरकार ने शोभा यात्रा को रोका है, वह अनुचित है।












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