6 साल में NASA ने डिजाइन किया 174 करोड़ रुपए का खास टॉयलेट, जानिए क्या है फीचर्स
नई दिल्ली। स्पेस में कई अंतरिक्ष यान भेज चुकी अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने 6 साल की लंबी मेहनत के बाद एक खास टॉयलेट तैयार किया है। ये टॉयलेट खासकर अंतरिक्षा यात्रियों के लिए तैयार किया गया है, जो स्पेस में रहने के दौरान इसका इस्तेमाल करेंगे। NASA ने इस टॉयलेट को महिला ऐस्ट्रोनॉट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। स्पेस में रहने के दौरान महिला ऐस्ट्रोनॉट्स को टॉयलेट के लिए चुनौती का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। नासा के इस खास टॉयलेट ने उनकी मुश्किल अब दूर हो जाएगी। आइए जानें इस यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के इस खास टॉयलेट के बारे में......

6 साल में NASA ने तैयार किया खास टॉयलेट
अमेरिकी स्पेस रिसर्च एजेंसी नासा ने स्पेस मिशन पर जाने वाली महिला ऐस्ट्रोनॉट्स की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए Universal Waste Management System नाम का खास टॉयलेट डिजाइन किया है। इस खास टॉयलेट को बनाने में नासा को 6 साल का वक्त लगा। इसे सितंबर 2020 तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजने की तैयारी की जा रही है। नासा ने इस खास टॉयलेट को लेकर कहा कि महिला ऐस्ट्रोनॉट्स की बढ़ती संख्या के साथ टॉयलेट को लेकर उनकी समस्या को गंभीरता से लिया गया और इसे तैयार किया गया है।

174 करोड़ का टॉयलेट
इस टॉयलेट को बनाने में नासा को 6 महीने का वक्त लगा, वहीं इसकी कीमत जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इस टॉयलेट को बनाने में नासा ने 23 मिलियन डॉलर यानी 174 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। दरअसल नासा पिछले कई दशक से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में पुराने मॉडल के माइक्रोग्रैविटी टॉयलेट का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसकी वजह से महिला ऐल्ट्रोनॉट्स को काफी परेशानी हो रही थी। पुराने टॉयलेट में महिला एस्ट्रोनॉट्स के लिए अलग से कोई अरेंजमेंट नहीं थी, जिसकी वजह से उन्हें मुश्किल होती थी। हालांकि नए टॉयलेट में अब ऐसा नहीं होगा। नया टॉयलेट महिला और पुरूष दोनों के लिए बनाया गया है।

क्या है इस टॉयलेट में खास
इस खास टॉयलेट की बात करें तो इसे महिला ऐस्ट्रोनॉट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, लेकिन इसका इस्तेमाल पुरूष और महिला दोनों स्पेस में कर सकते हैं।
यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम टॉयलेट को बनाने में 6 साल और 174 करोड़ रुपए लगे।
पुराने मॉडल वाले टॉयलेट में मल को खींचकर उसे रिसाइकल कर देता था, लेकिन नए टॉयलेट में फनल-फंक्शन सिस्टम होगा, जिससे अंतरिक्ष में रहते हुए ऐस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट का उपयोग बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
ये टॉयलेट पुराने टॉयलेट के मुकाबले कम जगह लेगा। इसका वजह से पहले के मुकाबले कम है।
नए टॉयलेट में यूरिन ट्रीटमेंट की भी सुविधा है।
वहीं पहले वाले टॉयलेट में यूरीन और मल को अलग-अलग करना मुश्किल था, जबकि नए टॉयलेट में इसकी रिसाइक्लिंग अलग-अलग और आसानी से होगी।
इस टॉयलेट का इस्तेमाल नासा 2024 में अपने मून मिशन के दौरान भी इसका इस्तेमाल करने की यारी कर रहा है।












Click it and Unblock the Notifications