देश की जनता को राहत, जनवरी में थोक महंगाई दर में आई थोड़ी कमी

नई दिल्ली, 14 फरवरी: भारत के थोक मूल्य सूचकांक (होलसेल महंगाई) के आंकड़ों को सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने जारी किया। जिससे पता चला कि जनवरी में देशभर में थोक मुद्रास्फीति 12.96 प्रतिशत हो गई, जबकि दिसंबर 2021 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) 13.56 प्रतिशत था। पिछले साल नवंबर के WPI को 14.23 प्रतिशत से संशोधित कर 14.87 प्रतिशत कर दिया गया। ऐसे में देखा जाए तो दिसंबर की तुलना में जनवरी में 0.40% थोक महंगाई दर कम रही है।

WPI

रिपोर्ट के मुताबिक ये लगातार 10वां महीना है, जब थोक महंगाई दर डबल डिजिट (10 से ऊपर) में रही। इससे पहले सरकार ने खुदरा महंगाई डेटा जारी किया था, जो दिसंबर में 5.59 फीसदी रही। ये पांच महीनों का उच्चतम स्तर था। इससे पहले नवंबर में खुदरा महंगाई दर 4.91 फीसदी और अक्टूबर में 4.48 फीसदी रही थी। सरकार का दावा है कि वो महंगाई को कंट्रोल करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं, ताकी महामारी के इस मुश्किल दौर में जनता पर बोझ कम पड़े।

संसद में सरकार ने दी थी सफाई
पिछले एक साल में देश में महंगाई काफी ज्यादा बढ़ गई है। हाल ही में संसद के बजट सत्र में भी ये मुद्दा उठा था, जिस पर खाद्य प्रसंस्करण मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल सफाई दी थी। उन्होंने राज्यसभा में बताया कि देश में सब्जियों और फलों की कीमत में जो उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, उसके पीछे की वजह खराब मौसम समेत कई कारण हैं। प्रह्लाद सिंह ने कहा कि मौसमी परिस्थितियों के कारण ही आलू, प्याज और टमाटर जैसी टॉप फसलें महंगी होती हैं। गैर पारंपरिक इलाकों से फल और सब्जियों का आना भी महंगाई का बड़ा कारण है।

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