PNB Scam: इस शख्स की बात मान लेता PMO तो 2 साल पहले पकड़ा जाता नीरव मोदी

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक के 11500 करोड़ के घोटाले को बैंकिंग सेक्टर का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। चंद बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल सी चौकसी ने बैंक को 11500 करोड़ का चूना लगाया। इस घोटाले ने लचर बैंकिंग सिस्टम की भी पोल खोल दी है। आरबीआई के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा है और पीएमओ की अनदेखी को सामने ला दिया है। ये घोटाला 2016 में ही सामने आ जाता अगर पीएमओ ने एक शख्स की शिकायत को तव्वजो दी होती। पीएमओ की अनदेखी की वजह से ये घोटाला चलता रहा और अब जाकर इसका भंडाफोड़ हुआ है। आपको उस शख्स के बारे में बता रहे हैं जिसने 2016 में ही प्रधानमंत्री कार्यालय से इस घोटाले की शिकायक की थी।

कौन हैं हरिप्रसाद एसवी

कौन हैं हरिप्रसाद एसवी

बैंगलुरु के ज्वैलर्स हरिप्रसाद एसवी वो शख्स हैं, जिन्होंने 2016 में ही इस घोटाले को लेकर सरकार को जानकारी दी थी। उन्होंने पीएमओ को ईमेल के जरिए इस महाघोटाले की जानकारी दी थी, लेकिन सरकार ने उनकी शिकायत को अनदेखा कर दिया। हरिप्रसाद ने 26 जुलाई 2016 को [email protected] से प्रधानमंत्री ऑफिस को मेल किया था । उन्होंने लिखा था कि ये घोटाला विजय माल्या,सुब्रत रॉय और रामालिंगा राजू की ही तरहबड़ा घोटाला है। उन्होंने लिखा कि मुंबई स्थित एक कंपनी लोगों का 1000 करोड़ रुपए बैंकों से गलत तरीके से निकाल रही है। उन्होंने गीतांजलि जेम्स लिमिटेड कंपनी और उसके चेयरमैन मेहुल सी चौकसी के नाम से अपने ईमेल में शिकायत की। उन्होंने गीतांजलि और मेहुल चौकसी की वित्तीय अनियमिताओं का पूरा ब्यौरा भी दिया, लेकिन पीएमओ ने इसकी अनदेखी कर दी।

हरिप्रसाद की शिकायत को किया नजरअंदाज

हरिप्रसाद की शिकायत को किया नजरअंदाज

हरिप्रसाद बेंगलुरु के ज्वैलर्स है। उन्होंने गीतांजलि की फ्रेंचाइजी ले रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चौकसी ने उनसे वादा किया था कि 10 करोड़ के निवेश पर उन्हें हर महीने 5.5 लाख रुपए किराया और 10 लाख रुपए मासिक रुप से मिलेंगे। लेकिन चौकसी अपनी बातों से मुकर गया। जिसके बाद हरिप्रसाद ने पहले बेंगलुरु में केस दर्ज कराया फिर मामला सीबीआई के पास पहुंच गया।

 सिस्टम की अनदेखी से हुआ 11500 करोड़ का घोटाला

सिस्टम की अनदेखी से हुआ 11500 करोड़ का घोटाला

हरिप्रसाद ने बताया कि जब उनके ईमेल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो उन्होंने फिर से 29 जुलाई 2016 को पीएमओ के ईमेल भेजा। उन्होंने ईमेल में इस बात की चिंता जताई कि अगर वक्त रहते एक्शन नहीं लिया तो माल्या की तरह चौकसी भी भारत से फरार हो जाएगा और हुआ भी वहीं, मेहुल चौकसी देश से फरार हो गया। पीएमओ से निराशा मिलने के बाद उन्होंने 29 जुलाई 2016 को उसे ईमेल को महाराष्ट्र में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को भेज दिया, लेकिन किसी तरफ से सकारात्मक जवाब नहीं मिलने के बाद उनका सिस्टम से विश्वास उठा गया, हालांकि उन्होंने मेहुल चौकसी के खिलाफ अपनी जंग जारी रखी। आज उसी अनदेखी का नतीजा है कि नीरव मौदी और मेहुल चौकसी ने देख को 11500 करोड़ का चूना लगाकतर विदेश फरार हो गए।

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