महंगाई : अमेरिका में अब लोन लेना महंगा,फेडरल रिजर्व ने 22 साल बाद बढ़ाई ब्याज दरें
महंगाई की मार से त्रस्त आम जनता के लिए एक और बुरी खबर है। भारत में आरबीआई के बाद अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में इजाफा किया है। जानिए इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।
वॉशिंगटन, 5 मई : यूएस फेडरल रिजर्व ने प्रमुख ब्याज दर में आधा प्रतिशत (0.5 %) का इजाफा किया है। साल 2000 के बाद से यह सबसे बड़ा बदलाव है। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का मतलब उपभोक्ताओं और व्यवसायों से ज्यादा ब्याज की वसूली है। अमेरिका में ऋण दरों में उछाल के कारण गिरवी रखे जाने वाली सिक्योरिटी, क्रेडिट कार्ड और ऑटो ऋण भी प्रभावित होंगे। खाद्य, ऊर्जा और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेजी आएगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 22 साल के बाद बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके कारण अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों को दिए जाने वाले उधार और अधिक महंगे होंगे। लोगों के खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी। आर्थिक विकास भी धीमा पड़ने की आशंका है। अमेरिका की प्रमुख ब्याज दरों में उछाल के संबंध में यूएस फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने के बाद कहा कि फेडरल रिजर्व कुछ ऐसा करना चाहता है, जिससे आर्थिक विकास में अड़चन न पैदा हो। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक ब्याज दरों को एक ऐसे स्तर पर लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाई जा सके। अधिकारियों के मुताबिक स्थिरता का लक्ष्य 2.4 फीसद ब्याज दर के साथ इस वर्ष के अंत तक हासिल किया जा सकता है।
- अमेरिका में मुद्रास्फीति 40 वर्षों में सबसे अधिक, काबू पाने के प्रयास में जुटा फेडरल रिजर्व
- यूएस फेडरल रिजर्व ने बेंचमार्क अल्पकालिक ब्याज दर को आधा प्रतिशत बढ़ाया
- इंटरेस्ट रेट में साल 2000 के बाद से सबसे अधिक उछाल
- भारत में भी महंगाई बढ़ने की आशंका
फेडरल रिजर्व (फेड) ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क अल्पकालिक ब्याज दर को आधा प्रतिशत (0.5 फीसद) बढ़ाया। फेड रिजर्व की ओर से आने वाले दिनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का संकेत भी दिया गया है। फेड की प्रमुख दर में वृद्धि के बाद यह 0.75% से 1% के बीच है। कोरोना महामारी के बाद यह ब्याज दरों की उच्चतम रेंज है।
फेड ने यह भी घोषणा की है कि वह अपनी 9 ट्रिलियन यूएस डॉलर की बैलेंस शीट को कम करना भी शुरू करेगा। बैलेंस शीट में मुख्य रूप से ट्रेजरी और गिरवी रखे गए बॉन्ड शामिल हैं। महामारी के कारण आई आर्थिक मंदी के बाद फेड की होल्डिंग दोगुने से अधिक हो गई थी। लंबी अवधि के लिए मिलने वाले उधार की ब्याज दरों को कम करने की कोशिश के तहत खरबों डॉलर के बॉन्ड (bonds in trillions) खरीदे गए। ऐसे में फेड के ताजा फैसले के बाद यानी होल्डिंग्स कम करने से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। लोन लेना और महंगा हो जाएगा।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व को उम्मीद है कि उच्च उधार लेने की लागत बढ़ने से मुद्रास्फीति नियंत्रित की जा सकेगी। लोग पैसे कम खर्च कम करेंगे। हालांकि, इसके बावजूद आर्थिक मंदी जैसे हालात नहीं बनेंगे। फेड को व्यापक आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि क्रेडिट पर सख्ती, यानी ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला बहुत धीमी गति से किया गया है। फेड के हालिया फैसले से आर्थिक मंदी पैदा नहीं होगी, अर्थशास्त्रियों ने इस भरोसे पर संदेह भी जताया है।
यूएस फेडरल रिजर्व के इंट्रेस्ट रेट में उछाल के बाद बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं ने कहा कि वे मुद्रास्फीति से जुड़े जोखिमों के प्रति सतर्क हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन पर रूसी सेना के आक्रमण के कारण तेल और खाद्य सामग्री की कीमतों में उछाल देखा गया है। इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ रहा है। बयान में कहा गया है कि चीन में COVID संबंधी लॉकडाउन से सप्लाई चेन में व्यवधान की आशंका है, इसके कारण मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है।












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