Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Budget 2026 Expectation: टैक्स से AI तक इन 10 बड़े मोर्चों पर मिल सकता है सरप्राइज, बजट से क्या-क्या उम्मीदें?

Budget 2026 Expectation In Hindi: 28 जनवरी से संसद का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है और 1 फरवरी 2026, जो इस बार रविवार को पड़ रहा है, उस दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। आमतौर पर रविवार को बजट नहीं आता इसलिए पहले तारीख बदलने की चर्चाएं भी हुईं, लेकिन अब साफ है कि इसी दिन देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला बजट आएगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होकर यह सत्र दो हिस्सों में चलेगा, जिसमें सरकार कई अहम बिल भी लाने वाली है।

इसी बीच KPMG की प्री-बजट रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि इस बार बजट का फोकस सिर्फ खर्च बढ़ाने पर नहीं, बल्कि टैक्स सिस्टम को आसान बनाने, विवाद घटाने और भारत को ग्लोबल निवेश के लिए और आकर्षक बनाने पर होगा। भारत की अर्थव्यवस्था 2026-27 में 7 से 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है। मजबूत उपभोक्ता मांग, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और सरकार की नीतियां इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही हैं।

Budget 2026 Expectation In Hindi

लेकिन टैक्स से जुड़े मुकदमों का पहाड़ अब भी चिंता बना हुआ है। 5 लाख 40 हजार से ज्यादा टैक्स अपीलें पेंडिंग हैं। यही वजह है कि बजट 2026 से सबसे बड़ी उम्मीद टैक्स विवादों को जल्दी निपटाने और नियमों को ज्यादा साफ बनाने की है। ऐसे में आइ जानते हैं कि जनता को देश के बजट से क्या-क्या उम्मीदें हैं।

1. आम करदाताओं के लिए राहत की उम्मीद

सरकार से उम्मीद है कि सेक्शन 24(b) के तहत खुद के घर पर लिए गए लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही शादीशुदा कपल्स के लिए जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम लाने की भी चर्चा है, ताकि टैक्स प्लानिंग आसान हो और परिवारों को फायदा मिले। विदेश में काम करने वाले भारतीयों के लिए भी राहत की मांग है कि फॉरेन टैक्स क्रेडिट उन्हें टीडीएस के समय ही मिल जाए, न कि सिर्फ रिटर्न फाइल करते वक्त।

2. ESOP और कैपिटल गेन पर बड़ी सफाई

जो कर्मचारी विदेश शिफ्ट हो गए हैं, उनके लिए ESOP टैक्स को लेकर अभी काफी भ्रम है। बजट 2026 में इसे साफ किया जा सकता है। वहीं, मर्जर और अधिग्रहण में मिलने वाले कंटिंजेंट पेमेंट पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे लगे, इस पर भी नए नियम आने की उम्मीद है।

3. मैन्युफैक्चरिंग और नई टेक्नोलॉजी पर जोर

सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ज्यादा डिप्रिसिएशन बेनिफिट दे सकती है, क्योंकि इस इंडस्ट्री में मशीनों की घिसावट ज्यादा होती है। साथ ही AI, रोबोटिक्स और स्पेस जैसी उभरती टेक्नोलॉजी पर टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने की तैयारी है ताकि भारत इन सेक्टरों में दुनिया से मुकाबला कर सके।

स्टेलर इनोवेशंस के बोर्ड चेयरमैन शशि भूषण के मुताबिक बजट 2026 का लक्ष्य भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाना होना चाहिए। इसके लिए घरेलू AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन को मजबूत सरकारी समर्थन मिलना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि AI आधारित डेटा सेंटर्स को 20 साल की टैक्स छुट्टी दी जाए ताकि बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हो सके।

इसके साथ ही कंप्यूटर क्रेडिट स्कीम शुरू की जानी चाहिए, जिससे स्टार्टअप्स और रिसर्च लैब्स को कम लागत पर कंप्यूटिंग पावर मिल सके। शशि भूषण ने यह भी कहा कि ग्रीन और सॉवरेन क्लाउड क्षमता के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग दी जानी चाहिए, ताकि IndiaAI मिशन के तहत GPU स्केलिंग के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सके।

4. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए नया नियम

ईवी कंपनियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। अभी कार पर मिलने वाले परक्विजिट का वैल्यूएशन इंजन क्षमता से तय होता है, जो ईवी पर लागू नहीं होता। बजट 2026 में इसके लिए अलग फार्मूला आने की उम्मीद है।

5. रोजगार बढ़ाने के लिए टैक्स छूट

सेक्शन 80JJAA के तहत नई नौकरियां पैदा करने वाली कंपनियों को टैक्स फायदा मिलता है। सरकार इसे और आसान बना सकती है ताकि कंपनियां ज्यादा हायरिंग करें।

6. टैक्स कानूनों का अपराधीकरण खत्म करने की दिशा

पिछले बजट में कुछ टैक्स अपराधों को डिक्रिमिनलाइज किया गया था। इस बार और धाराएं अपराध की कैटेगरी से बाहर की जा सकती हैं ताकि कारोबारियों पर डर का माहौल कम हो।

7. GST 2.0 को और सरल बनाने की तैयारी

GST में इनपुट टैक्स क्रेडिट को और आसान करने, एक्सपोर्ट रिफंड जल्दी देने और इंटरमीडियरी सर्विसेज पर विवाद खत्म करने जैसे बदलाव हो सकते हैं। इससे कैश फ्लो सुधरेगा और छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी।

8. कस्टम्स और विदेशी व्यापार में सुधार

डिजिटल कस्टम्स, तेज विवाद निपटान, टैरिफ स्ट्रक्चर को सरल बनाना और एडवांस रूलिंग का दायरा बढ़ाना, ये सब बजट 2026 के बड़े एजेंडा हो सकते हैं।

9. MSME और ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव

छोटे उद्योगों को सस्ता क्रेडिट, आखिरी छोर तक मदद और ग्लोबल अनिश्चितता से बचाने के उपाय आने की उम्मीद है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन क्रेडिट और केमिकल इंडस्ट्री के लिए टैक्स छूट से क्लाइमेट चेंज से लड़ने की रणनीति मजबूत होगी।

एडकाउंटी मीडिया के को-फाउंडर और CFO अभिन्नव आर जैन के अनुसार बजट 2026 से डिजिटल और मीडिया सेवाओं से जुड़े MSMEs को 'मिसिंग मिडिल' समस्या से राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल क्रेडिट गारंटी सीमा बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि डेटा आधारित और आसान फाइनेंसिंग सिस्टम की जरूरत है।

उन्होंने सुझाव दिया कि MSEs के लिए क्रेडिट गारंटी सीमा 10 करोड़ रुपये और एक्सपोर्टर्स के लिए 20 करोड़ रुपये तक बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही एक ऐसा कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म बने जो GST, ई-इनवॉइस, ITR और बैंक स्टेटमेंट का डेटा जोड़कर 50 लाख रुपये तक के बिना गारंटी लोन तुरंत उपलब्ध कराए।

GST 2.0 के तहत 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए तिमाही रिटर्न और AI आधारित कंप्लायंस टूल लागू करने की बात भी उन्होंने कही, जिससे प्रशासनिक बोझ करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके अलावा 10,000 करोड़ रुपये का MSME ग्रोथ फंड फिनटेक्स के जरिए दिया जाए और जिलों में ट्रांसफॉर्मेशन सेल बनाकर मेंटरशिप को बढ़ाया जाए। इससे करीब 50 लाख नए उद्यमी जुड़ सकेंगे और GDP में MSME का 30 प्रतिशत योगदान और मजबूत होगा।

10. डिफेंस और R&D में निवेश

वैश्विक तनाव के बीच स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च बढ़ सकता है, जिससे आत्मनिर्भर भारत को रफ्तार मिलेगी।

कुल मिलाकर बजट 2026 से उम्मीद है कि यह टैक्स को आसान, कारोबार को सस्ता और भारत को दुनिया के निवेशकों के लिए ज्यादा भरोसेमंद बनाएगा। अगर सरकार इन मोर्चों पर सही चाल चली, तो यह बजट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि देश की ग्रोथ स्टोरी का नया अध्याय बन सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के लिए क्रेडिट और ट्रेड सपोर्ट की मांग

सराफ फर्नीचर के फाउंडर और CEO रघुनंदन सराफ ने कहा कि फर्नीचर और कंज्यूमर गुड्स जैसे मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के लिए बजट 2026 में सबसे जरूरी है सस्ता और तेज कर्ज और व्यापारिक सुरक्षा। उन्होंने निर्यातकों के लिए टर्म लोन गारंटी की सीमा मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 40 करोड़ रुपये करने की मांग की।

साथ ही उन्होंने टैरिफ से प्रभावित सेक्टर जैसे जेम्स और लेदर के लिए एक ट्रेड रेजिलिएंस फंड बनाने का सुझाव दिया, जिससे GST आधारित स्कोरकार्ड के जरिए कैश फ्लो पर आधारित लेंडिंग को बढ़ावा मिलेगा और करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की नई लिक्विडिटी खुलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि ZED सर्टिफाइड यूनिट्स को सरकारी खरीद में प्राथमिकता और माइक्रो एंटरप्राइज के लिए 5 लाख रुपये की क्रेडिट कार्ड स्कीम से उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी और नए बाजार खुलेंगे। इसके साथ इंडस्ट्री 4.0 और ग्रीन टेक पर आधारित ट्रेनिंग सेंटर MSMEs को ग्लोबल सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनाने में मदद करेंगे, जिससे उनका मैन्युफैक्चरिंग में योगदान 36 प्रतिशत से और आगे बढ़ सकेगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+