Union Budget 2020: आम बजट पेश होने से पहले लोगों को हैं ये 10 बड़ी उम्मीदें

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज दूसरी बार आम बजट पेश करने जा रही हैं। सीतारमण लोकसभा में 2020-21 का आम बजट पेश करेंगी। बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। इस दूसरे बजट से कॉर्पोरेट से लेकर आम आदमी तक को कई तरह की उम्मीदे हैं। इस बार सरकार के लिए बजट में सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक सुस्ती से निपटने की है।

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चलिए जानते हैं आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आम लोगों को क्या उम्मीदे हैं-

  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स- लोगों को उम्मीद है कि सरकार 14 साल बाद फरवरी 2018 में फिर से लागू हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे सकती है। क्योंकि इस टैक्स के लगने के बाद टैक्स कलेक्शन में कुछ खास इजाफा तो देखने को नहीं मिला, साथ ही इसे लेकर लोगों में कन्फ्यूजन भी रहा है।
  • डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स- फिलहाल डिविडेंट इनकम से होने वाली कमाई पर आंशिक रूप से तीन (कॉरपोरेट टैक्स, डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स और इनकम टैक्स) तरह का टैक्स लगता है। इस बार इसमें राहत की उम्मीद की जा रही है, ताकि कंपनियां भारत में अपने बिजनेस को बढ़ाने पर काम कर सकें।
  • आय- मौजूदा अर्थव्यवस्था में लोगों के हाथ में पैसा होना काफी जरूरी है, ताकि वो इसे खर्च कर सकें। सरकार के पास कर में बढ़ोतरी करके आय जुटाने का विकल्प भी नहीं है। ऐसे में केवल विनिवेश और निजीकरण से आय जुटाने का ही विकल्प बचता है। उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में केंद्र सरकार विनिवेश के जरिए फंड जुटाने का लक्ष्य बड़ा करे।
  • कृषि क्षेत्र से आय में वृद्धि- कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी जरूरी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस क्षेत्र का योगदान रोजगार और जीडीपी में अधिक है। अब सरकार से उम्मीद है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर वो ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि के लिए कोई ऐलान करे।
  • सरकारी फंडिंग- इस बार उम्मीद की जा रही है कि सरकार पहले बजट की तर्ज पर ही एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मार्केट के लिए सॉवरेन फंड के जरिए फंड जुटाने का ऐलान कर सकती है।
  • रियल एस्टेट सेक्टर- बीते करीब दो साल से रियल एस्टेट सेक्टर में मांग की कमी की वजह से परेशानी बनी हुई है। इससे पहले बजट में किफायती घर मुहैया कराने पर सरकार का जोर रहा है। इस सेक्टर में मजबूती के लिए ये उम्मीद की जा रही है कि सरकार लोन को रिस्ट्रक्चर कर सकती है।
  • इनकम टैक्स सेक्शन 80C- इस नियम के तहत अधिकतर सैलरीड क्लास लोग टैक्स छूट का लाभ प्राप्त करते हैं। इस बार लोगों को उम्मीद है कि सरकार सेक्शन 80C के तहत टैक्स रियायत की सीमा बढ़ाए।
  • इनकम टैक्स स्लैब- मांग और खपत को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार टैक्स स्लैब में बदलाव कर आम लोगों को बड़ी राहत दे, इसकी भी उम्मीद है।
  • छोटे कारोबारी- सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत साल 2022 तक विनिर्माण क्षेत्र के लिए कुछ लक्ष्य रखे हैं। सरकार चाहती है कि इस सेक्टर का योगदान रोजगार और जीडीपी में बढ़े। हालांकि मौजूदा अर्थव्यवस्था से इसे कोई लाभ नहीं मिला। इसलिए इस बार उम्मीद है कि छोटे कारोबारियों के लिए क्रेडिट उपलब्धता को बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।
  • ऑटो सेक्टर- अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण इस सेक्टर में 2019-20 में खराब प्रदर्शन रहा है। इस सेक्टर में पैसेंजर व्हीकल्स की सेल्स में भारी गिरावट आई है। इस बार उम्मीद है कि सरकार इस सेक्टर को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए बड़े ऐलान कर सकती है। इसमें जीएसटी में कटौती की भी मांग की जा रही है। वर्तमान में ऑटोमोबाइल्स 28 फीसदी जीएसटी के दायरे में आता है, जिसे घटाकर 18 फीसदी किए जाने की मांग है।
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