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Ukraine-Russia War: यूक्रेन-रूस की लड़ाई से फीका पड़ेगा आपकी थाली का स्वाद, जानिए कैसे?

Ukraine-Russia War: यूक्रेन-रूस की लड़ाई से फीका पड़ेगा आपकी थाली का स्वाद, जानिए कैसे?

नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस की लड़ाई से विश्व के देश दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट यूक्रेन पर रूस की लड़ाई का विरोध कर रहे हैं तो वहीं दूसरा गुट रूस के साथ खड़ा दिख रहा है। यूक्रेन-रूस की इस लड़ाई का असर केवल उन देशों पर नहीं बल्कि वर्ल्ड इकोनॉमी पर पड़ने वाली है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकेगा। यूक्रेन-रूस के बीच शुरू हुई इस वॉर के कारण भारत में लोगों का बजट बिगड़ने वाला है। किचन से लेकर सड़कों पर असर पड़ने वाला है। भारत में आम आदमी की रसोई पर इस लड़ाई का असर पड़ सकता है तो वहीं पेट्रोल-डीजल, गैस जैसी मूलभूत जरूरत की चीजें महंगी हो सकती है।

 बिगड़ेगा आपका बजट

बिगड़ेगा आपका बजट

यूक्रेन-रूस के बीच शुरू हुए इस युद्ध का असर भारत के लोगों के किचन पर पड़ने वाला है। पिछले डेढ़ सालों से लोग वैसे ही कुकिंग ऑयल की बढ़ती कीमतों से परेशान है। सरसो तेल, रिफाइंड ऑयल, एडिबल ऑयल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है, जिसपर काबू पाने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। वर्तमान में सरसों तेल की कीमत 180-190 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं यूक्रेन पर जारी संकट के कारण इसमें बड़ी तेजी आने की उम्मीद है।

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     महंगा हो सकता है कुकिंग ऑयल

    महंगा हो सकता है कुकिंग ऑयल

    रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण भारत में कुकिंग ऑयल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है। आपको बता दें कि भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का 70 फीसदी हिस्सा आयात करता है।इसमें से सबसे ज्यादा सनफ्लावर ऑयल को भारत इंपोर्ट करता है। भारत में सनफ्लावर ऑयल की जरूरत का 90 फीसदी हिस्सा यूक्रेन और रूस से इंपोर्ट होता है। युद्ध की स्थिति में ये आयात प्रभावित होगा और मांग में तेजी के कारण तेल की कीमतों में तेजी आएगी। रूस और यूक्रेन के इस युद्ध से वैश्विक बाजार में उछल-पुथल मची हुई है। कुकिंग ऑयल के साथ-साथ कच्चे तेल और सोने-चांदी कीमत में तेजी देकने को मिल रही है।

     भारत की आम जनता पर बढ़ेगी मुश्किल

    भारत की आम जनता पर बढ़ेगी मुश्किल

    यानी रूस और यूक्रेन की लड़ाई के कारण आपके रसोई का बजट बिगड़ेगा। युद्ध के कारण यूक्रेन से आयात होने वाले सनफ्लावर ऑयल की आपूर्ति पर असर पड़ेगा। अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले साल 2021 में अप्रैल से लेकर दिसंबर तक भारत ने यूक्रेन से कुल जरूरत का 65 फीसदी सनफ्लावर ऑयल इंपोर्ट किया। भारत ने कुल 2 अरब डॉलर का ऑयल यूक्रेन से आयात किया। अगर युद्ध के कारण ये आपूर्ति रूक जाती है तो भारत में तेल की भारी कमी होगी और सनफ्लावर ऑलय की कीमत में तेजी आएगी।

     कच्चा तेल और महंगा

    कच्चा तेल और महंगा

    यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आएगी जिसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों पर पड़ेगा। यानी युद्ध की स्थिति में न केवल खाने के तेल की कीमतों में असर पड़ेगा, बल्कि सड़क पर गाड़ी लेकर निकलना भी महंगा होगा। वहीं डीजल की कीमतों में तेजी के कारण माल ढुलाई महंगी होगी और देश में महंगाई ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगा।

     कितने दिन का स्टॉक

    कितने दिन का स्टॉक

    आपको बता दें कि तेल कंपनियां अपने पास 45 से 55 दिन का स्टॉक रखती है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्द के कारण पिछले चार-पांच दिन से माल आपूर्ति में बाधा आ रही है। इंपोर्ट रूक गया है। ऐसे में कंपनियों ने स्टॉक करना शुरू कर दिया था। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तंल कंपनियों को सनफ्लावर ऑयल के लिए दूसरे निर्यातक देशों का रूख करना होगा।

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