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Titan Watch Brand: 800 गुना से अधिक रिटर्न देने वाली कंपनी, 32 देशों में कारोबार, सात हजार से अधिक कर्मचारी

Titan Watch Brand के पैमाने पर दुनिया की किसी भी घड़ी कंपनी से कमतर नहीं। आलम ये है कि करीब 32 देशों में टाइटम की घड़ियों को पसंद करने वाले लोग हैं। जानिए टाइटन का इतिहास, तमिलनाडु सरकार की साझेदारी वाली कहानी

Titan Watch Brand

Titan Watch Brand कैसे बना? इस सवाल का उत्तर खोजना काफी दिलचस्प है। सात हजार से अधिक कर्मचारी वाली ये कंपनी हर साल डेढ़ करोड़ से अधिक घड़ियां बनाती है। दरअसल, भारत की सरजमीं से जुड़ी विभूतियां आज कई वैश्विक कंपनियों की कमान संभाले हुए हैं। हालांकि, कई बार सक्सेस स्टोरी की चकाचौंध में संघर्षों की कहानियां छिप जाती हैं। टाइटन की कहानी ऐसी ही है। घड़ी की कंपनी टाइटन आज से 39 साल पहले तमिलनाडु सरकार के साथ साझेदारी में शुरू हुई थी। आज इस ब्रांड के मुरीद ग्राहक 32 देशों में फैले हैं। भरोसा ऐसा कि इस कंपनी के शेयर 800 गुना से अधिक रिटर्न दे चुके हैं।

घड़ियों की एडवांस बुकिंग!

दशकों पहले की शादियों में रेडियो, घड़ी और साइकिल मिला करती थी। सोने-चांदी और प्लैटिनम के गहनों के दौर में आज शायद इस बात पर यकीन करना मुश्किल हो, लेकिन ये भी उतना ही सच है कि एक समय में घड़ी खरीदने के लिए भी बुकिंग करनी पड़ती थी। 1960 से 1980 के आसपास घड़ियों की डिमांड इतनी थी कि आज जिस तरह गाड़ियों की बुकिंग करानी पड़ती है, वैसे ही घड़ियों के ग्राहकों को भी एडवांस बुकिंग करानी पड़ती थी।

तमिलनाडु सरकार के साथ साझेदारी, आज बनी मिसाल कंपनी

आजादी के बाद वाले कुछ साल भारत में हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) की धाक थी। एचएमटी की घड़ियां बेहद लोकप्रिय हुईं। देश की आर्थिक तरक्की के साथ-साथ लोग घड़ियां पहनना पसंद करने लगे थे, लेकिन अकेली कंपनी एचएमटी के लिए डिमांड के मुताबिक सप्लाई बेहद चुनौतीपूर्ण बनने लगी ती। इसी समय तमिलनाडु सरकार के साथ साझेदारी में शुरू हुई कंपनी टाइटन।

सात हजार कर्मचारियों वाली कंपनी

टाइटन नाम में टाटा इंडस्ट्रीज और तमिलनाडु सरकार के अधीन आने वाली तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TIDCO) नाम आधे-आधे लिखे हैं। आज से करीब 39 साल पहले 1984 में टाइटन की शुरुआत हुई थी। आज इतने सालों के बाद टाइटन के दुनियाभर में दो हजार से अधिक स्टोर हैं। हर दिन लगभग 1.6 करोड़ घड़ियां बनाने वाली टाइटन सात हजार से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनी है।

युवाओं के बीच लोकप्रियता के कारण

कामयाबी ऐसी कि 19 ब्रांड वाली टाइटन कंपनी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड घड़ी कंपनी है। टाटा ज्वैलरी मार्केट में अच्छी पकड़ रखती है। ऐसे में टाटा इंडस्ट्रीज की टाइटन ने पैसे भले ही ज्वैलरी से कमाए। 1970 में एचएमटी कंपनी वाली घड़ियां थोड़ी महंगी होने के कारण अधिक लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हो रही थीं। HMT मैकेनिकल घड़ियों का उत्पादन कर रही थीं, उसी समय टाइटन ने विदेश में पहनी जाने वाली घड़ियों की डिजाइन से प्रेरित होकर क्वार्ट्ज टेक्नोलॉजी की घड़ियां बनाईं। ये टाइटन की लोकप्रियता का अहम कारण बना।

टाइटन घड़ियों के अलावा परफ्यूम और चश्मे भी बनाती है

ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार टाइटन ने सब्सिडियरी यानी छोटी कंपनियों के साथ हाथ मिलाने से भी परहेज नहीं किया। टाइटन के अलावा जूप, सोनाटा और फास्टट्रैक जैसी घड़ियां आज हजारों-लाखों लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। घड़ियों के साथ कारोबार शुरू करने वाली टाइटन ने एलीट वर्ग के लिए ज्वैलरी भी बनाने लगी। ये कंपनी आज चश्मे भी बनाती है। परफ्यूम और ड्रेसिंग में भी टाइटन को पसंद करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं।

अटूट भरोसा: टाइटन 840 गुना से अधिक रिटर्न देने वाली कंपनी

टाटा की इस कंपनी पर ग्राहकों का भरोसा कितना है, इसका अंदाजा इसी बात से होता है कि इस कंपनी के शेयर में निवेश करने वाले लोगों को 840 से गुना से अधिक रिटर्न मिल चुके हैं। टाइटन में कई कंपनियों के शेयर हैं, यानी साझेदारी वाली इस कंपनी में टाटा संस की 21.4 फीसद हिस्सेदारी है। गत दिनों हमारे बीच से विदा हुए पद्मश्री धनकुबेर राकेश झुझुनवाला की कंपनी में भी टाइटन ने बड़ा अमाउंट निवेश किया। झुनझुनवाला फैमिली के पास 5.2 टाइटन के फीसद शेयर हैं। TIDCO दूसरे नंबर की साझेदार है।

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    दिलों की गहराई में बसा टाइटन, उपहार में देते हैं लोग

    इस कंपनी से जुड़ा दिलचस्प वाकया ये भी है कि करीब 32-35 साल पहले टाइटन की घड़ी खरीदने के लिए लोग विज्ञापन की प्रिंट लेकर जाते थे। एक पेज पर लगभग 100 घड़ियों का विज्ञापन टाइटन की एड स्टडी में अहम पड़ान माना जाता है। दिसंबर, 1987 में भारत की सिलिकॉन वैली कही जाने वाली बेंगलुरू में पहला शो रूम खोलने के बाद टाइटन आज कितना लोकप्रिय है, इसका अंदाजा इसी बात से होता है कि आज हजारों-लाखों लोग टाइटन की घड़ियों को गिफ्ट में देते हैं।

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