थोक महंगाई दर में नरमी, मार्च में घटकर 1% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें हुई सस्ती
नई दिल्ली। लॉकडाउन के बीच थोक महंगाई दर में नरमी आई है। मार्च महीने में हॉलसेल प्राइस इंडेक्स घटकर 1 फीसदी रह गई। मार्च 2020 में थोक महंगाई दर घटकर 1 फीसदी पर आ गया है। वहीं इससे पिछले महीने फरवरी में थोक महंगाई दर 2.26 फीसदी रहा था। मार्च में इसमें गिरावट आई है।

बुधवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने आंकड़े जारी किए है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च में महंगाई दर में गिरावट आई है। फरवरी 2020 के मुकाबले मार्च में महंगाई दर में 1.26 फीसदी की कमी आई और यह घटकर 1 फीसदी पर पहुंच गई। महंगाई दर घटने से खाने-पीने की चीजें भी सस्ती हुई है।
सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर नजर डाले तो 2020 में थोक महंगाई दर में भारी गिरावट आई। मार्च में देश में वस्तुओं की थोक मुद्रास्फीति फरवरी के 2.26 फीसदी के मुकाबले घटकर 1 फीसदी रह गई। वार्षिक आधार पर इसकी तुलना करें तो पिछले साल के मुकाबले मार्च में थोक महंगाई दर 3.18 फीसदी पर थी। खाने-पीने के सामान के दाम में भारी कमी के कारण थोक महंगाई दर में यह नरमी देखने को मिली है। वहीं मार्च में खाद्य मुद्रास्फीति फरवरी के 7.79 फीसद से घटकर मार्च में 4.91 फीसद पर आ गई।
क्या होता है महंगाई दर, कैसे डालता है असर
महंगाई दर को आसान शब्दों में समझने की कोशिश करते हैं। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें सामान्य से अधिक हो जाती हैं तो इस स्थिति को महंगाई के तौर पर जाना जाता है। अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जब वस्तुओं की कीमतें बढ़ती है तो परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। जब महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता घट जाती है। लेकिन जब महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है। महंगाई दर में बढ़ोतरी और कटौती का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है। सरकार वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर मुताबिक लेती है।












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