Sovereign Gold Bond: आसान भाषा में समझिए क्या है यह स्कीम, क्यों है जबरदस्त फायदे का सौदा
Sovereign Gold Bond Scheme 2023-24: गोल्ड यानि सोना खरीदना किसे पसंद नहीं है। गोल्ड में निवेश करना लगभग हर किसी की चाहत होती है। गोल्ड में निवेश दो तरह से किया जा सकता है। पहला तरीका होता है कि आप सीधे किसी ज्वेलरी शॉप से फिजिकल गोल्ड खरीद लें दूसरा डिजिटल गोल्ड में निवेश करें।
डिजिटल गोल्ड में निवेश करने के कई विकल्प मौजूद हैं। लेकिन भारत सरकार रिजर्व बैंक के माध्यम से समय-समय पर गोल्ड बॉन्ड लेकर आता है, जिसे निवेशक खरीद सकते हैं और गोल्ड में निवेश कर सकते हैं।

19 जून से खुल रहा सब्सक्रिप्शन
सोवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2023-24 की पहली सीरीज का सब्सक्रिप्शन सोमवार यानि 19 जून से खुल रहा है। इसके लिए इश्यू प्राइस 5926 रुपए रखा गया है। जो लोग ऑनलाइन इसमे निवेश करेंगे उन्हें 50 रुपए की छूट मिलेगी। ध्यान देने वाली बात है कि इस स्कीम में सिर्फ शुक्रवार यानि 23 जून तक ही निवेश कर सकते हैं। इसके बाद यह क्लोज हो जाएगा।
नहीं मिलता है फिजिकल गोल्ड
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह यह इलेक्ट्रॉनिख फॉर्म में होता है, इसमे आपको फिजिकल तौर पर गोल्ड नहीं दिया जाता है बल्कि आपको एक सर्टिफिकेट दिया जाता है, जिसमे आपके द्वारा गोल्ड में निवेश की जानकारी दर्ज होती है। इसे आपके ईमेल पर भेज दिया जाता है।
कौन खरीद सकता है
इसे कोई भी कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है। साथ ही ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी, संस्था आदि भी गोल्ड बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम को आप खुद के नाम पर या किसी के साथ साझा तौर पर भी खरीद सकते हैं। इसमे नामांकन की सुविधा भी उपलब्ध होती है। साथ ही आप नाबालिग के लिए भी निवेश कर सकते हैं।
कहां से खरीदें
गोल्ड बॉन्ड को खरीदने के लिए आप पोस्ट ऑफिस का संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके पास डीमैट अकाउंट है तो आफ बीएसई या फिर एनएसई से भी खरीद सकते हैं।
इसके अलावा कई सारे बैंकों से भी आप इसे खऱीद सकते हैं। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से भी इसे आप खरीद सकते है। इसे आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं और इसके लिए आपको कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है।
कितनी खरीद की अनुमति
एक वित्त वर्ष में आप न्यूनतम 1 ग्राम गोल्ड इस स्कीम के तहत खरीद सकते हैं। अधिकतम सीमा 4 किलोग्राम की है। यह सीमा व्यक्तिगत और एचयूएफ के लिए है। साथ ही ट्रस्ट आदि अधिकतम 20 किलोग्राम गोल्ड बॉन्ड स्कीम के तहत गोल्ड खरीद सकते हैं।
कैसे करें भुगतान
डिजिटल गोल्ड बॉन्ड खरीदने के लिए आपके पास अधिकतम 20 हजार रुपए का कैश इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा डीडी, चेक आदि के जरिए भी आप इसे खरीद सकते हैं। ऑनलाइन पेमेंट पर आपको हर ग्राम पर 50 रुपए की छूट मिलती है। इसी वजह से ऑनलाइन गोल्ड खरीदना सबसे आसान है।
किस दाम पर मिलेगा
इश्यू प्राइस की बात करें तो आरबीआई ने पहले ही इसे जारी कर दिया है 14, 15, 16 जून को गोल्ड के औसत दाम के आधार पर इसे निर्धारित किया गया है। लिहाजा इसके दाम को लेकर आपको माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है, जो दाम आरबीआई की ओर से तय किया गया है आपको उसी पर इसे खरीदना होगा।
बेचने पर दाम कैसे तय होगा
लेकिन अगर आप इसे बेचना चाहते हैं तो 999 शुद्धता के गोल्ड की आखिर के तीन दिनों में जो कीमत होगी उसके औसत दाम पर आप इसे बेच सकते हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स असोसिएशन लिमिटेड की वेबसाइट पर हर रोज 999 शुद्धता के गोल्ड के दाम जारी किए जाते हैं, यहां से आप इसकी कीमत जान सकते हैं।
8 साल की अवधि के लिए निवेश
इस बॉन्ड की अवधि 8 साल की होती है, इसे समय से पहले भी हम इसे बेच सकते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात है कि 5 साल से पहले आप इस बॉन्ड को बेच नहीं सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको पैसों की जरूरत है तो आप इस बॉन्ड पर लोन ले सकते हैं।
हर 6 महीने पर ब्याज
आपको गोल्ड बॉन्ड पर ब्याज भी मिलता है। हर वर्ष आपको 2.5 फीसदी का ब्याज मिलता है। अच्छी बात यह है कि एक तरफ जहां आपके गोल्ड का दाम बढ़ता है तो दूसरी तरफ आपको ब्याज भी मिलता है। यह ब्याज आपके बैंक खाते में सीधे हर 6 महीने में आता है।
कमाई पर कितना टैक्स
अगर आप इस गोल्ड बॉन्ड को पूरे 8 साल तक रखते हैं तो आपको इस गोल्ड बॉन्ड पर हुई कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। हालांकि इससे पहले इसे बेचने पर आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन देना पड़ सकता है। हर 6 महीने में जो ब्याज आता है वह कर के दायरे में आता है।
क्यों है फायदे का सौदा
गोल्ड बॉन्ड खरीदना इसलिए भी फायदे का सौदा है क्योंकि इसमे कोई जोखिम नहीं होता है, इसे ताले में रखने की जरूरत नहीं होती है, चोरी होने का डर नहीं होता है। गोल्ड में मिलावट की गुंजाइश नहीं होती है क्योंकि यह डिजिटल फॉर्म में होता है। एक तय ब्याज मिलती है। हर साल आपके गोल्ड का दाम बढ़ता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन जोकि 20 फीसदी होता है वह इसपर नहीं लगता है। साथ ही आयकर एक्ट 1961 के तहत आपको कर में भी छूट मिलती है।












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