Silver Rate Surges: चांदी की लंबी छलांग, 2025 में 160% रिटर्न के बाद 2026 में कितना बढ़ेगा दाम?
Silver Rate Surges: साल 2025 निवेश की दुनिया में 'चांदी' के नाम रहा। जहां अन्य संपत्तियां उतार-चढ़ाव से जूझ रही थीं, वहीं चांदी ने 160% से ज्यादा का रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया। दिसंबर के अंत में एक ही दिन में कीमतों में 10% की भारी गिरावट आई, जिससे बाजार में थोड़ी हलचल तो मची, लेकिन इसने चांदी की लंबी अवधि की तेजी की चमक को कम नहीं किया।
अकेले दिसंबर महीने में ही चांदी 30% तक चढ़ी, जो इसकी जबरदस्त मांग का प्रमाण है। अनिश्चित वैश्विक हालातों, उद्योगों में बढ़ती खपत और आपूर्ति की कमी जैसे कारणों ने इसे 2025 की सबसे सफल संपत्ति (Asset) बना दिया। अब सवाल यह है कि क्या यह तेजी 2026 में भी बरकरार रहेगी?

अनिश्चित दुनिया में 'सेफ हेवन' बनी चांदी
सोने की तरह चांदी को भी हमेशा से एक सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। 2025 में वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव (Trade Tensions), अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती ने निवेशकों का भरोसा कीमती धातुओं पर बढ़ाया। जब भी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता आती है, निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं, और चांदी ने इस बार उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया।
चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। इसका एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है।
- सोलर पैनल: रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ते कदमों ने चांदी की खपत बढ़ा दी है।
- इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV): ईवी की बैटरी और सर्किट में चांदी एक अनिवार्य तत्व है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन से लेकर जटिल सेमीकंडक्टर्स तक, चांदी की मांग हर जगह है। इन सभी क्षेत्रों में आई तेजी ने चांदी के लिए खरीदारों की एक लंबी कतार खड़ी कर दी है।
मांग और आपूर्ति का बड़ा अंतर
चांदी की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम रही है। चूंकि अधिकांश चांदी अन्य धातुओं (जैसे तांबा या जस्ता) की खदानों से सह-उत्पाद (By-product) के रूप में निकलती है, इसलिए मांग बढ़ने पर भी इसका उत्पादन तुरंत बढ़ाना मुमकिन नहीं हो पाया। इस सप्लाई डेफिसिट ने कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
राजनीतिक फैसलों ने लगाई आग!
नवंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने चांदी को 'अहम खनिजों' (Critical Minerals) की सूची में शामिल किया। इस फैसले से सप्लाई चेन में रुकावट और भविष्य में ऊंचे टैक्स का डर पैदा हुआ। वहीं, चीन ने भी चांदी सहित कई धातुओं के निर्यात पर कड़े नियम लागू कर दिए। इन फैसलों ने पूरी दुनिया, खासकर अमेरिका में चांदी जमा करने की एक होड़ पैदा कर दी।
भारत में चांदी के प्रति बढ़ता आकर्षण
भारतीय निवेशकों ने इस तेजी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जैसे-जैसे सोना पहुंच से बाहर हुआ, छोटे निवेशकों ने चांदी के ETF (Exchange Traded Funds) का रुख किया।
सितंबर 2025 में निवेश: अकेले इस महीने में चांदी ईटीएफ में 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया।
प्रीमियम पर बिक्री: अक्टूबर तक भारत में चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों से 5-12% ज्यादा थे। भारी मांग को देखते हुए कई फंड्स ने अस्थायी रूप से नए निवेश लेना भी बंद कर दिया ताकि अत्यधिक ऊंचे दामों पर खरीदारी से बचा जा सके।
2026 के लिए विशेषज्ञों की राय
2025 में तांबा और अन्य औद्योगिक धातुओं के साथ चांदी ने जो दौड़ लगाई, वह 2026 की शुरुआत में भी जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़त के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) आना स्वाभाविक है। चांदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन निवेशकों को अब थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत होगी क्योंकि आगे का रास्ता उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है।
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