Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले धराशायी हुआ रुपया, पहली बार 80 के पार, जानिए क्या है इसका मतलब?
Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले धराशाही हुआ रुपया, पहली बार 80 के पार, जानिए क्या है इसका मतलब?
नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया धराशायी हो गया है। पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 80 के पार हो गया है। रुपए में जारी इस गिरावट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजारों मंदी की आशंका, अमेरिका में लगातार बढ़ रही महंगाई के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण डॉलर और भारतीय रुपए के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। भारतीय रुपए अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

रुपए हुआ धड़ाम
पहली बार रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। आज रुपया 80.2 के स्तर तक पहुंच गया है। रुपए में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां भारत पहले से ही बढ़ती महंगाई और घटते विकास दर के जूझ रहा है, वहां डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने से चिंताए और बढ़ गई है। अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही है।
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2014 से अब तक 25 फीसदी गिरा रुपया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपए की गिरावट को लेकर कहा था कि भारतीय रुपया दिसंबर 2014 के बाद से अब तक अमेरिकी डॉलर की तुलना में 25 प्रतिशत तक गिर चुका है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि भारतीय रुपया ही नहीं बल्कि डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड, जापानी मुद्रा येन और यूरो भी कमजोर हुआ है। इन मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपए की स्थिति फिर भी ठीक है।

क्यों गिर रहा है भारतीय रुपया
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर भारतीय रुपए पर पड़ रहा है। जैसे-जैसे क्रूड ऑयल महंगा होता जा रहा है डॉलर और मजबूत होता जा रहा है। रुपए में जारी इस गिरावट के कारण भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। भारत आयात का एक बड़ा हिस्सा डॉलर के बदले होता है और डॉलर की चढ़ती कीमतों के कारण ये आयात महंगे होते जा रहे हैं जिसका असर बाजार पर देखने को मिल रहा है। इतना ही नहीं आम लोगों तक महंगाई की ये मार पहुंच रही है।

गिरता रुपया सीधा आपकी जेब पर डालेगा असर
रुपए में लगातार आ रही गिरावट का असर सीधा आम आदमी पर भी होगा। अगर रुपया इसी तरह से गिरता रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। भारत के लिए कच्चा तेल खरीदना महंगा होता चला जाएगा । कच्चे तेल के इंपोर्ट में सरकार को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे और इसकी सीधा असर तेल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई पर दिखेगा और खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा की चीजें महंगी होती चली जाएंगी। रुपए के गिरने से विदेशों में पढ़ाई महंगी हो जाएगी। आयात महंगा होगा तो वहीं विदेश घूमने के लिए आपको पहले के मुकाबले अधिक खर्च करने पड़ेगे।
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