रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर बनाए रखने के लिए RBI का नया प्लान, बेच सकता है डॉलर

डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक चिंता में है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि केंद्रीय बैंक संभवता डॉलर बेचे, ताकि रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर बनाए रखा जा सके।

भारतीय रुपया 17 अगस्त को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 83.15 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि ये रुपये का सबसे निचला स्तर नहीं है। रुपये का सबसे निचला स्तर इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान 20 अक्टूबर, 2022 को बना था, जब रुपया 83.29 रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।

RBI

आरबीआई ने रुपये को 83 के स्तर के करीब वापस लाने के लिए डॉलर बेचने की संभावना जताई है। मामले में साउथ इंडियन बैंक के ट्रेजरी के उप महाप्रबंधक रितेश भुसारी ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये में अस्थिरता और एकतरफा उतार-चढ़ाव को रोकना चाहता है। विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के साथ हमें लगता है कि रुपये का 83.25 से नीचे गिरना मुश्किल होगा।

उन्होंने आगे कहा कि डॉलर और अन्य एशियाई मुद्राओं में उतार-चढ़ाव के कारण उनका रुपये के मूल्य में गिरावट को लेकर पूर्वाग्रह था, लेकिन आरबीआई के हस्तक्षेप से डॉलर की गति धीमी हो जाएगी।

रुपया क्यों हो रहा कमजोर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत हो रहा है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली हो रही। जिसका साफ असर रुपये की स्थिति पर पड़ रहा है।

रुपये में हो रहा अंतरराष्ट्रीय कारोबार
वहीं दूसरी ओर हाल ही में भारत की टॉप ऑयल कंपनी 'इंडियन ऑयल' ने यूएई की अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से दस लाख बैरल तेल खरीदा। वैसे तो ये आम बात है, लेकिन इस सौदे में जो लेन-देना हुआ, वो काफी दिलचस्प रहा। ये खरीद इंडियन ऑयल ने भारतीय रुपयों में की, जबकि इससे पहले के सौदे अमेरिकी डॉलर में होते थे।

वहीं 25 किलो सोने की एक डील संयुक्त अरब अमीरात से हुई थी। उसमें भी भारतीय रुपयों में लेन-देन हुआ।

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