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RBI Monetary Policy 2025: होम और कार लोन सस्ता हुआ या नहीं? RBI के बड़े फैसले के बाद आम आदमी को क्या मिला?

आज बुधवार यानि 1 अक्टूबर 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है। यह वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मौद्रिक नीति समिति (MPC) की चौथी द्वि-मासिक बैठक थी, जिसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की।

इस फ़ैसले पर सभी की निगाहें टिकी थीं, क्योंकि यह फैसला हाल ही में सरकार द्वारा GST दरों में की गई कटौती और महंगाई दर के RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे रहने के बाद आया है।

Sanjay Malhotra

RBI के प्रमुख फ़ैसले: दरें और नीतिगत रुख

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC के सर्वसम्मत फ़ैसलों की घोषणा की

  • रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं: MPC ने रेपो रेट को 5.50% पर ही रखा है। यह लगातार दूसरी बार है जब RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
  • परिणाम: रेपो रेट अपरिवर्तित रहने के कारण, सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर और बैंक दर 5.75% पर बनी रहेगी, जबकि स्थायी जमा सुविधा (STF) दर 5.25% पर स्थिर रहेगी।
  • नीतिगत रुख (Policy Stance): MPC ने अपना नीतिगत रुख 'तटस्थ' (Neutral) बनाए रखने का भी फैसला किया है।

RBI ने महंगाई के अनुमान को घटाया और विकास को समर्थन देने का दिया संकेत

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान से पता चलता है कि देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और अब नीतिगत फैसले विकास को और समर्थन देने की ओर उन्मुख हो सकते हैं।

  • महंगाई का अनुमान कम हुआ: RBI ने इस वित्तीय वर्ष के लिए औसत हेडलाइन मुद्रास्फीति (Inflation) के अनुमान को घटा दिया है।
  • नया अनुमान: मुद्रास्फीति का अनुमान अगस्त के 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया गया है।
  • कारण: यह संशोधन मुख्य रूप से खुदरा महंगाई (Retail Inflation) दर के 4% के लक्ष्य से नीचे रहने और कोर महंगाई (Core Inflation) के नियंत्रित रहने की उम्मीद के कारण किया गया है।
  • विकास को समर्थन देने का संकेत: गवर्नर ने कहा कि वर्तमान वृहद आर्थिक स्थितियां (Macroeconomic Conditions) और भविष्य के अनुमानों ने अब नीतिगत हस्तक्षेप (Policy Space) के अवसर खोल दिए हैं, जिससे विकास दर को और अधिक समर्थन दिया जा सके।
  • वैश्विक चुनौतियां: हालांकि, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और टैरिफ (tariff) से जुड़े घटनाक्रमों के कारण इस वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही (H2) और उसके बाद भी विकास दर धीमी (decelerate) होने की आशंका है।

RBI के बड़े फैसले के बाद आम आदमी को क्या मिला?

रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि फिलहाल बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज (जैसे होम लोन, कार लोन) की ब्याज दरों में कोई तत्काल बदलाव नहीं आएगा। हालांकि, RBI द्वारा महंगाई के अनुमान को कम करने और विकास को समर्थन देने की बात कहने से भविष्य में आगे और रेट कटौती की गुंजाइश बनी हुई है।

किसके लिए है राहत?

गोयल गंगा डेवलपमेंट्स के निदेशक अनुराग गोयल के अनुसार, RBI द्वारा रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का निर्णय दो प्रमुख वर्गों को सीधे राहत पहुंचाता है। सबसे पहली राहत होम लोन चुका रहे लोगों को मिली है, क्योंकि वे साल की शुरुआत से लागू कम ब्याज दरों पर ही अपनी EMI का भुगतान करते रहेंगे। दूसरी बड़ी राहत घर खरीदारों और डेवलपर्स के लिए है।

GST दरों में हालिया कटौती के कारण निर्माण सामग्री और संपत्ति-संबंधी लागत में कमी आई है, जिससे आवास अब समग्र रूप से अधिक किफायती हो गया है। इन नीतिगत बदलावों ने खरीदारों के लिए वित्तीय प्रबंधन को सरल बना दिया है, और डेवलपर्स को भी लागत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना आसान हो गया है।

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