क्या जाते-जाते लोन की EMI कम कर जाएंगे रघुराम राजन?
नई दिल्ली। अपने फैसलों के लोकप्रिय भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन मंगलवार यानी 9 अगस्त को मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करने वाले हैं। रघुराम राजन के कार्यकाल की यह आखिरी समीक्षा होगी। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि जाते-जाते रघुराम राजन उन्हें कोई शानदार तोहफा देकर जाएंगे। दरअसल, 4 सितंबर को रघुराम राजन के कार्यकाल का अंतिम दिन है।

यह समीक्षा न केवल रघुराम राजन के कार्यकाल की आखिरी समीक्षा होगी, बल्कि इसके बाद रिजर्व बैंक का गवर्नर मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश नहीं करेगा। नए गवर्नर के कार्यकाल के शुरू होते ही मौद्रिक नीति की समीक्षा की जिम्मेदारी एक छह सदस्यीय कमेटी करेगी। आपको बता दें कि अगली मौद्रिक नीति की समीक्षा 4 अक्टूबर को पेश की जाएगी।
अर्थशास्त्रियों का क्या है कहना?
जहां एक ओर महंगाई की मार झेल रहे लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जाते-जाते रघुराम राजन ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं, जिससे ईएमआई कम हो जाएगी। वहीं दूसरी ओर, लाइव मिन्ट ने 10 अर्थशास्त्रियों से बात की है, जिनमें से 9 का कहना है कि ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं होगी। रघुराम राजन ब्याज दरों को जस का तस रख सकते हैं और इसमें कटौती या बढ़ोत्तरी करने का फैसला आने वाले गवर्नर पर छोड़ सकते हैं।
अभी क्या हैं ब्याज दरें?
आपको बता दें कि फिलहाल रेपो रेट 6.5 प्रतिशत है, वहीं दूसरी ओर रिवर्स रेपो रेट 6 प्रतिशत है। इसके अलावा सीआरआर की दर 4 फीसदी की है। सिर्फ बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच का मानना है कि इस समीक्षा में रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन जाते-जाते लोगों को तोहफे के रूप में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट या 0.25 फीसदी की कटौती कर सकते हैं।












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