पीएम मोदी का सवाल कैसे चीन का 'लॉस' हो सकता है भारत का 'प्रॉफिट'
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक निवास सात रेस कोर्स में इस समय देश के बैंकर्स और कुछ खास अरबपतियों से मुलाकात कर रहे हैं। दुनिया की खास अर्थव्यवस्थाओं में मची उथल-पुथल के मद्देनजर ही पीएम मोदी की यह मीटिंग कई तरह से काफी महत्वपूर्ण है।

सूत्रों की मानें तो पीएम ने इस मीटिंग में चीन के हालातों का जिक्र खासतौर पर किया है। उन्होंने देश के उद्योगपतियों से पूछा है कि कैसे भारत चीन के नुकसान का फायदा उठाने में सक्षम हो सकता है।
मीटिंग में एसौचैम के भी कई सदस्य मौजूद हैं। पीएम मोदी को इस मीटिंग में बताया गया है कि भारत को आने वाले आर्थिक संकट से निबटने के लिए कई तरह के कड़े उपाय करने ही पड़ेंगे।
ब्याज दरों में कटौती के साथ ही कई चाइनीज उत्पादों जैसे स्टील पर नई तरह की ड्यूटीज लगानी होंगी। आपको बता दें कि इस मीटिंग में आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन भी मौजूद हैं।
एसौचैम के मुताबिक भारत के हालात वर्ष 2013 के बाद से सुधरे हैं लेकिन इसमें बाहर आयात होने वाली वस्तुओं की कीमतों का भी खासा योगदान था। इन कीमतों की वजह से उस समय महंगाई की दर दोहरी संख्या तक थी, वह भी कुछ हद तक रुक गई थी।
आईएमएफ ने भारत की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक नतीजों की उम्मीद जताई है। चीन की खराब हालत के बीच ही पीएम मोदी को लगता है कि अभी देश में ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है। हालांकि भारत के लिए चीन के हालातों का फायदा उठाना इतना आसान नहीं हो पाएगा।
निवेशकों और उद्योगपतियों ने मोदी को साफ कर दिया है कि अभी तक सरकार की ओर से आर्थिक सुधार के कदमों में कोई खास तेजी नजर नहीं आ रही है। इसका नतीजा है कि वृद्धि दर जून तक सिर्फ सात प्रतिशत पर ही टिक गई है।
अमेरिकी निवेशक जिम रोजर्स की मानें तो पीएम मोदी ने एक सफल अभियान चलाया। वह दो वर्षों तक लोगों से कहते रहे कि उन्हें क्या करना है, वह बखूबी जानते हैं। लेकिन अब 15 माह के बाद भी देश में कुछ खास नहीं हो सका है। जिम रोजर्स अमेरिका के वह सबसे बड़े निवेशक हैं जिन्होंने हाल ही में भारत से अपना व्यापार समेट लिया है।












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