पेट्रोल-डीजल ही नहीं LPG सिलेंडर भी देंगे झटका, कीमत बढ़ोतरी जल्द
नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमत में जल्द बढ़ोतरी हो सकती है। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी जारी है, लेकिन भारत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण तेल कंपनियों ने कीमत में बढ़ोतरी नहीं की इस दवाब को झेलते रहे, लेकिन अब जब कि विधानसभा चुनाव खत्म हो गए हैं, ऐसे में तेल कंपनियां जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी तक अपने दवाब को कम करने की कोशिश में जुटी है। यानी आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में 12 से 15 रुपए तक की तेजी हो सकती है। सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि रसोई गैस की कीमत में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

रसोई गैस की कीमत में तेजी
रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध का असर अब आपके किचन पर पड़ने वाला है। 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण जहां सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी से लोगों को राहत दे रही थी, वहीं अब चुनाव खत्म होने के बाद ये बोझ जनता पर पड़ने की संभावना है। रिपोर्ट्स की माने तो आने वाले हफ्ते में रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी की जा सकती है।

100 से 200 रुपए तक बढ़ सकते हैं दाम
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद आशंका जताई जा रही है कि मार्च के बाद कभी भी गैस सिलेंडर की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 100 से 200 रुपए तक की तेजी हो सकती है। आपको बता दें कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच गैस की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। 2008 के बाद पहली बार गैस की कीमत प्रति गैलन औसतन 4 अमरीकी डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में तेल कंपनियां अपने ऊपर से दवाब को कम करने के लिए बढ़ी कीमतों का बोझ आम जनता पर डाल सकती है। चुनाव के कारण जो बोझ अब तक तेल कंपनियां झेल रही थी अब उसे ग्राहकों पर डाला जा सकता है।

चुनाव खत्म होते ही झटका
चुनाव खत्म होते ही घरेलू गैस सिलेंडर के साथ पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ने के आसार है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत पर असर पड़ रहा है। आपूर्ति प्रभावित होने के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दवाब बना हुआ है। आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। आयात पर निर्भरता के कारण तेल की वैश्विक कीमत का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है और घरेलू पेट्रोल-डीजल के दाम कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों से प्रभावित होते हैं।












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