New vs Old Tax Regime: नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में बेहतर कौन? जानिए किसमें है ज्यादा फायदा
अगले महीने से साल 2023 के लिए आईटीआर की फाइलिंग शुरू हो जाएगी। इससे पहले अप्रैल के महीने में कर्मचारियों को अपनी कंपनी को यह बताना होता है कि वे किस टैक्स रिजीम के तहत अपना टैक्स कटवाना चाहते हैं।

वित्त वर्ष 2022-23 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) ई-फाइलिंग जल्द ही शुरू होने वाली है। माना जा रहा है कि, अप्रैल के अंत तक यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगा। लेकिन इससे पहले आपको एक जरूरी काम करना होगा। लोगों को नए और पुराने इनकम टैक्स रिजीम को चुनना होगा।
बजट 2023 में घोषित आयकर अधिनियम, 1961 में हुए बदलाव 1 अप्रैल, 2023 से प्रभावी हो गए हैं। ये बदलाव वित्त वर्ष 2023-24 के लिए लागू होंगे। इस वित्त वर्ष से सरकार ने नए टैक्स रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया है।
इससे यह पुराने टैक्स रिजीम से ज्यादा आकर्षक हो गया है। इस रिजीम में आपको 7 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। अगर आप कर्मचारियों/ एंप्लॉयी हैं तो पुरानी कर व्यवस्था और नई कर व्यवस्था के बीच चुनने का समय आ गया है। इस काम को हम आपके लिए आसान बना देते हैं।

न्यू टैक्स रिजीम
- टैक्स पेयर नई टैक्स रिजीम चुनता है तो उसे 5 लाख रुपये की जगह 7 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
- नई कर व्यवस्था चुनने वालों को सरकार ने 50,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा।
- नई टैक्स व्यवस्था में 30 फीसदी का टैक्स 15 लाख से ऊपर की इनकम पर देना होगा।
- वहीं 10 से 12 लाख की इनकम पर 10 फीसदी टैक्स और 12 से 15 लाख रुपये की इनकम पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा।
- इसमें निवेश पर मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी।
ओल्ड टैक्स रिजीम
- पुरानी टैक्स व्यवस्था में इनकम टैक्स से मुक्त होने की सालाना आय सीमा 5.50 लाख रुपये ही है।
- इस टैक्स रिजीम में 10 लाख रुपये से अधिक की इनकम पर 30 फीसदी के टैक्स देना होगा।
- इस रिजीम पर आपको निवेश के बदले टैक्स छूट का लाभ मिलेगा।
- सरचार्ज और एचईसी दरों और मानक कटौती में कोई बदलाव नहीं।

जानिए किसमें है ज्यादा फायदा
- नए बजट में न्यू टैक्स रिजीम को बढ़ावा देने का प्रावधान किया है। इसे आकर्षक बनाने के लिए कई स्टैंडर्ड डिडक्शन ऑफर किए गए हैं।
- न्यू टैक्स रिजीम टैक्स रिबेट की सीमा दो लाख रुपये बढ़ा दी गई है। पुराने में ऐसा प्रवधान नहीं है।
- पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाले लाभ की सार्थकता तभी है जब आप ज्यादा से ज्यादा डिडक्शन क्लेम कर पाएं।
- नई कर व्यवस्था में कम टैक्स दरें आकर्षक लग सकती हैं लेकिन इसमें पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाले टैक्स डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता।
- दोनों टैक्स रिजीम चुनते समय व्यक्ति को इस पर ध्यान देना चाहिए कि वह पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाली कर छूट और कटौतियों में कितनी क्लेम कर सकता है।
इन बातों का जरूर रखें ख्याल
1 अप्रैल, 2023 से, अगर कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता को अपनी पसंदीदा कर व्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं देता है तो नियोक्ता डिफॉल्ट रूप से बजट 2023-24 में घोषित नई संशोधित टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनेगा।
यही नहीं एक बार किसी व्यवस्था को चुनने के बाद आप (व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स) पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान नहीं बदल सकेगा। इसलिए समय रहते अपना टैक्स के इस गणित को समझ कर अपना विकल्प अपने नियोक्ता को बता दें।












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