PM Internship Portal: मोदी सरकार लॉन्च कर रही पोर्टल, टॉप कंपनियों में युवाओं को मिलेगा इंटर्नशिप का मौका
PM Internship Portal: केंद्र की मोदी सरकार 3 अक्टूबर को इंटर्नशिप पोर्टल लांच करने जा रही है। युवाओं के कौशल और रोजगार क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई PM इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) ये पोर्टल लॉंच किया जा रहा है।
इस पोर्टल के जरिए देश की टॉप 500 कंपिनयों में देश के लगभग 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने का रास्ता खुलेगा। आइए जानते हैं इस पोर्टल पर कौन और कब अप्लाई कर सकता हैं और क्या सरकार की ओर से इंटरर्नशिप के दौरान धनराशि के तौर पर क्या कोई वजीफा (stipend) मिलेगा?

पोर्टल पर कब कर सकते हैं अप्लाई?
पोर्टल लॉच होने के बाद देश भर की टॉप कंपनियां इस पोर्टल पर इंटर्नशिप पोस्ट को अपलोड करेंगी। जिसके बाद ही इस पोर्टल को पात्र उम्मीदवाों के लिए आवेदन के लिए ओपेन किया जाएगा। इस पोर्टल के जरिए 12 अक्टूबर से, पात्र उम्मीदवार आवेदन करना शुरू कर सकते हैं।
1 करोड़ युवाओं को मिलेगा इंटर्नशिप का मौका
माेदी सरकार की इस योजना के तहत पहले चरण में देश के 30 लाख युवाओं को कंपनियों में इंटरशिप करवा कर स्किल्ड किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में तीन साल के अंदर इस योजना के तहत 70 हजार युवाओं को स्किल्ड किया जाएगा।
योजना का उद्देश्य
मोदी सरकार ने इस योजना का ऐलान केंद्रीय बजट में किया था। यह योजना, रोजगार और कौशल के लिए प्रधान मंत्री के पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पांच वर्षों के भीतर एक करोड़ से अधिक युवाओं को स्किल्ड बनाने का है खासतौर पर उन बैंग्राउंड पर ध्यान केंद्रित करना है जिनके रोजगार की संभावना कम है।
पोर्टल में कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना में वो ही पात्र होगा जो आवेदक किसी भी पूर्णकालिक रोजगार में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा उनके परिवार के सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होने चाहिए। IIM, IISER जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से स्नातक या CA या CMA जैसी योग्यता रखने वाले लोगों को बाहर रखा गया है। हालांकि ITI और कौशल केंद्र (skill center) के व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के तहत उन लोगों को वरीयता दी जाएगी जिन्हें इसकी अधिक आवश्यकता है।
सरकार इंटर्नशिप के दौरान क्या देगी stipend
इस योजना के तहत मोदी सरकार की ओर से इंटर्नशिप करने वाले युवा को हर महीने 5,000 रुपये का वजीफा (stipend) देने का वादा किया गया है, जिसमें सरकार डीबीटी (direct benefit transfer) के जरिए 4,500 रुपये देगी। जबकि कंपनियां निर्धारित राशि से अधिक भुगतान करने का विकल्प चुन सकती हैं, लेकिन कोई भी अतिरिक्त राशि उनके सीएसआर व्यय में नहीं गिनी जाएगी। सरकार आकस्मिक व्यय के लिए प्रति प्रशिक्षु 6,000 रुपये का वार्षिक अनुदान भी प्रदान करेगी।
कंपनियां अपने सीएसआर फंड से 500 रुपये जोड़ती हैं। इस योजना में भाग लेने वाली कंपनियों को पिछले तीन वर्षों में उनके औसत सीएसआर खर्च के आधार पर चुना गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके पास इस पहल का समर्थन करने की क्षमता है। इसके अलावा, कंपनियां इंटर्नशिप की पेशकश के लिए अपनी सप्लाई चेन या समूह के भीतर दूसरों के साथ सहयोग कर सकती हैं, जिससे इंटर्नस को तरह-तरह का एक्सपीरिएंस मिल सके।












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