आज से खुल गया है LIC IPO, जानिए निवेश करना चाहिए या नहीं

नई दिल्ली, 04 मई। लाइफ इंश्योरेंस ऑफ इंडिया के आईपीओ का इंतजार आज खत्म हो गया है। आज एलआईसी का आईपीओ खुल गया है और जो भी निवेशक आईपीओ में सब्सक्राइव करना चाहते हैं वो कर सकते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि 9 मई तक तक आईपीओ में आवेदन के लिए आपके पास मौका है। एलआईसी में निवेश करने के इच्छुक लोग कंपनी के बिजनेस, फंडामेंटल और एनालिटिक्स पर रिसर्च कर रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं क्या एलआईसी में निवेश करना फायदे का सौदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एलआईसी में निवेश लंबे समय के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एलआईसी में निवेश करना चाहिए या नहीं दोनों बारे में ही बताएंगे, लेकिन निवेश पर अंतिम फैसला आपको ही अपने विवेक से लेना है।

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    क्यों आईपीओ में करें आवेदन
    कंपनी की ओर से मूल्यांकन को काफी आकर्षक रखा गया है। लोगों को बेहद कम दाम में कंपनी में हिस्सेदारी प्राप्त करने का मौका दिया जा रहा है। सरकार की ओर से कंपनी के मूल्यांकन को तकरीबन 50 फीसदी कम किया गया है, इसे 6 लाख करोड़ दिखाया गया है, जोकि प्राइवेट कंपनियों की तुलना में तकरीबन 2.5 से 4 गुना कम है,लिहाजा निवेशकों के लिए यह काफी आकर्षक मूल्यांकन है।

    बीमा कंपनियों में एलआईसी देश की सबसे बड़ी कंपनी है, बीमा क्षेत्र में एलआईसी का हिस्सा तकरीबन 65 फीसदी है, यानि तमाम प्राइवेट कंपनियों की तुलना में एलआईसी कहीं बड़ी कंपनी है। एक तरफ जहां तकरीबन 35 फीसदी बाजार ही अन्य बीमा कंपनियों के पास है, तो अकेले एलआईसी के पास तकरीबन 65 फीसदी बाजार है। लिहाजा माना जा रहा है कि निवेशकों के निवेश से कंपनी और बड़ी हो सकती है और इसका सीधा लाभ लोगों को मिलेगा। एलआईसी में प्रीमियम कमीशन सबसे अधिक 5.5 फीसदी है जबकि देश की अन्य चार बड़ी कंपनियों में यह 4.4फीसदी है।

    क्यों नहीं खरीदे
    हालांकि एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है, लेकिन पिछले 8 सालों में कंपनी का बाजार तकरीबन 7 फीसदी कम हुआ है। 2014 में जहां एलआईसी की बाजार में हिस्सेदारी लगभग 72 फीसदी था, तो पिछले 8 साल में इसकी हिस्सेदारी कम होकर 65 फीसदी तक पहुंच गई है। जोकि कंपनी के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

    एलआईसी अन्य प्राइवेट कंपनियों की तुलना में ऑनलाइन पॉलिसी की खरीदने को बढ़ावा नहीं देता है, जिसकी बड़ी वजह है कि उसके एजेंट कंपनी के लिए सबसे अधिक बिजनेस लेकर आते हैं। वहीं अन्य प्राइवेट कंपनियां अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसी को खरीदने के लिए जमकर प्रचार करती हैं। कंपनी के पास बड़ा दबाव यह है कि वह अपने एजेंट्स को नाराज नहीं कर सकती, जोकि लंबे अवधि के लिए कंपनी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    एलआईसी अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने निवेशकों और एजेंट्स में बांटती है, जोकि शेयर धारकों के लिहाज से मुनाफे की बात नहीं है। इसके अलावा एलआईसी में सरकार का हस्तक्षेप भी कंपनी के लिए मुश्किल खड़ी करता है। कई बार कंपनी को ऐसे जगहों पर निवेश करना पड़ता है जोकि कंपनी के बिजनेस के लिए ठीक नहीं है। इसी का एक उदाहरण आईडीबीआई बैंक में निवेश है।

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