नोटबंदी के बाद 7 ऐसे तरीके जिनके जरिए बैंक वाले कर रहे हैं कालेधन को सफेद करने का खेल
वो तरीके सामने आए हैं जिनसे पता चला है कि कैसे बैंक के मैनेजर और कर्मचारी बाहर के लोगों से मिलकर गोलमाल कर रहे थे। आइए हम आपको बताते हैं कि वो 7 तरीके जिनसे लोगों को लगाया जा रहा था चूना।
नई दिल्ली। देश में विमुद्रीकरण के फैसले को लागू हुए 36 दिन हो गए हैं। इस बीच जहां आरबीआई ने 51 नए नियम बनाएं तो वहीं भ्रष्ट बैंक कर्मचारियों ने भी काले धन को सफेद करने का खुला खेल खेला है। इस दौरान आयकर विभाग, पुलिस की छापेमारी में देश भर में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। ऐसे में वो तरीके सामने आए हैं जिनसे पता चला है कि कैसे बैंक के मैनेजर और कर्मचारी बाहर के लोगों से मिलकर गोलमाल कर रहे थे। आइए हम आपको बताते हैं कि वो 7 तरीके जिनसे लोगों को लगाया जा रहा था चूना।
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ऐसे ग्राहक की पहचान करना जिसके लगाया जा सके चूना
नोटबंदी के फैसले के बाद अपने नोट बदलवाने और बैंकों में जमा करने के लिए बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। लोग अपने रुपए बदलवाने के लिए बैंकों में पैन कार्ड और पहचान पत्र जैसे दस्तावेज बैंकों को दे रहे हैं, पर इन्हीं दस्तावेजों का गलत प्रयोग हो रहा है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने जांच में पाया कि बैंक में काम करने वाले मैनेजरों ने चोरी-छिपे ग्राहकों के दस्तावेजों का अवैध लेन-देन में प्रयोग किया। सीबीआई ने बेंगलुरु के इंदिरानगर स्थित कर्नाटक बैंक के मुख्य प्रबंधक सूर्यनारायण बेरी को इसी तरह के फर्जीवाड़े में पकड़ा था।

एटीम के जरिए हुई रुपयों की हेराफेरी
नोटबंदी के फैसले के बाद देश भर में दो दिन के सारे एटीएम बंद कर दिए गए थे। यह कहा गया कि एटीएम में नए नोट डालने की प्रक्रिया और एटीमए में बदलाव के लिए यह एटीएम बंद किए गए हैं। आयकर विभाग, इनकम टैक्स और सीबीआई की जांच में यह पता चला कि बैंक अधिकारियों ने बाहरी एजेंसियों का मिलाकर काले धन को सफेद बनाने में मदद ली। जांच में पता चला है कि एटीएम में जब पैसा खत्म हो जाता था तो इसका संदेश बैंकों तक पहुंच जाता था। जांच में सामने आया कि जिन एटीएम के जरिए पैसों का लेन-देन किया गया, उन एटीएम को पैसा खत्म होने के बाद बंद कर दिया जाता है और जो पैसा एटीएम में डाला जाना चाहिए था वो पैसा कहीं और पहुंचा दिया जाता था।
सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि धनलक्ष्मी बैंक के 31 एटीएमों में डाले जाने के लिए 1.30 करोड़ रुपए के नए नोट जारी किए थे पर ये जनता तक पहुंचे ही नहीं। बल्कि यह पैसे कर्नाटक सरकार के अधिकारियों एससी जयचंद्र, चंद्रकांत रामलिंगम और उनके सहयोगियों के पास पहुंच गए। यह मामला सामने आने पर कर्नाटक सरकार ने इस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

जन धन खातों के जरिए हुआ खेल
नोटबंदी के फैसले के बाद जन धन खातों का जमकर गलत इस्तेमाल हुआ। जांच में पता चला है कि बैंक अधिकारियों ने हर बैंक में जन धन खातों का प्रयोग काले धन को खपाने में किया। हर बैंक में कम से कम 10 फीसदी खातों का प्रयोग इसके लिए किया गया। एक राष्ट्रीय बैंक की बैंगलुरू के विजयनगर शाखा में खुले जनधन खाते में अचानक ही 2 लाख रुपए आ गए जबकि उस खाते में पहले 500 रुपए मात्र जमा थे। खाता धारक के मोबाइल पर मैसेज आया तो वो रुपए निकालने बैंक पहुंचा पर उसे वापस लौटा दिया गया। बाद में उस जन धन खाते में जमा 2.30 लाख रुपए को किसी ओर के खाते में जमा कर दिया गया।

डिमांड ड्राफ्ट बना काले धन को सफेद करने का जरिया
सरकार को लगा था कि नोटबंदी का फैसला करने के बाद आसानी से सारा कालाधन अपने पास जमा कर लेगी। पर बैंक अधिकारियों ने ही उन्हें चूना लगा दिया। बैंक अधिकारियों ने पहले डिमांड ड्रॉफ्ट बनवाएं और बाद में उनको निरस्त कर दिया। बैंक वालों ने पहले पुराने नोटों से कालाधन बनवाया और बाद में डीडी निरस्त कर नए नोटों में रुपए वापस कर दिए। आयकर विभाग ने अपनी जांच में पाया कि दो व्यापारियों गोपाल और अश्विनी जी सुंकू ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बासवगुंडी ब्रांच में 149 डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 71.49 लाख रुपए जमा कराए। बाद में सारे के सारे डिमांड ड्रॉफ्ट निरस्त कर दिए गए। अब इन निरस्त किए गए डीडी की जांच हो रही है।

बैंक में काम करने वाले कैशियर भी शामिल
बैंक में काम करने वाले कैशियर भी कमिशन लेकर पुराने नोटों को नए नोटों से बदलने का काम खूब किया। आयकर विभाग ने जांच में पाया है कि यह तरीका ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में अपनाया गया जहां नोट बदलवाने के लिए बैंक गए गरीबों और बैंक के नियमों के बारे में जानकारी न रखने वालों को ढगा गया। बैंक में काम करने वाले कैशियर ने जमा हुए पुराने नोटों को बैंक में पहले से मौजूद बता दिया। कहा गया है कि बैंक के पास पहले से ही सिर्फ बड़े नोट ही थे, छोटे नोट थे ही नहीं। बाद में गरीब लोगों को पहचान पत्र जमा करने के झंझट से मुक्त करने के लिए बदले उनसे 25 फीसदी का कमिशन लिया गया। वहीं कुछ फर्जी पहचान पत्र भी इस मामले में प्रयोग किए गए। इस मामले में आरबीआई के एक कर्मचारी को बैंक ने गिरफ्तार किया है।

फर्जी खातों का खेल, बैंक वालों ने कराया मेल
कुछ मामलों में जिन ईमानदार खाताधारकों के पहचान पत्र बैंकरों के हाथ लगे, उनके नाम पर खाते खोलकर उसके जरिए पैसे की हेराफेरी की गई। ऐसे बैंक खातों में पुराने नोट जमा करके नए नोट निकाले गए। जांचकर्ता ऐसे नए बैंक खातों की जांच कर रहे हैं जो नोटबंदी के फैसले के बाद खोले गए और बाद में उनमें लेन-देन बंद हो गया।

एनजीओ ने भी किया खेल
नोटबंदी के बाद छोटे दुकानदारों से 10, 20, 50 या 100 रुपए जमा करने वाले माइक्रो फाइनेंस एजेंट्स ने भी एनजीओ के जरिए उनके बैंक खातों में डालकर हेराफेरी की गई। इस मामले में पिछली तारीख दिखाकर भी पैसा जमा किए गए। इसके बाद आयकर विभाग की जांच के दायरे में 5000 एनजीओ और एजेंट हैं।












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