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अनिल अंबानी दिल्ली में ED दफ्तर पहुंचे, FEMA जांच में पूछताछ के लिए किया तलब

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी गुरुवार यानि आज सुबह करीब 11 बजे दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय पहुंचे। वे रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए जांच एजेंसी के सामने पेश हुए। यह पेशी उन समन के बाद हुई है जो उन्हें पहले जारी किए गए थे।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में पुष्टि की है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने RBI के नियमों के तहत रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके प्रमोटर अनिल अंबानी के खातों को आधिकारिक तौर पर 'धोखाधड़ी' (Fraudulent) श्रेणी में डाल दिया है। SBI ने इसकी रिपोर्ट RBI को दे दी है और CBI में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में है।

industrialist Anil Ambani

संपत्तियों की बड़ी कुर्की: Abode से लेकर DAKC तक

ED की स्पेशल टास्क फोर्स (मुख्यालय) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अनिल अंबानी की मुंबई स्थित आलीशान रिहायशी संपत्ति 'Abode' को अटैच कर लिया है, जिसकी कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये है।

इससे पहले इस संपत्ति का 473.17 करोड़ का हिस्सा पहले ही अटैच किया जा चुका था। इसके अलावा, नवी मुंबई स्थित 'धिरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी' (DAKC) की 132 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 4,462.81 करोड़ रुपये है, उसे भी कुर्क किया गया है। रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुल 15,700 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां ईडी द्वारा अटैच की जा चुकी हैं।

बैंकों के साथ 40,000 करोड़ की धोखाधड़ी

CBI की FIR के आधार पर ED की जांच में सामने आया है कि RCom और उसकी ग्रुप कंपनियों ने देशी-विदेशी बैंकों से भारी कर्ज लिया था। वर्तमान में इन कंपनियों पर कुल 40,185 करोड़ रुपये का बकाया है। पांच बड़े बैंकों ने समूह के इन खातों को 'फ्रॉड' घोषित कर दिया है।

फंड की हेराफेरी और 'शेल' कंपनियों का खेल

जांच एजेंसी ने फंड डायवर्जन के कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • लोन एवरग्रीनिंग: करीब 13,600 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पुराने कर्ज को छुपाने (Evergreening) के लिए किया गया।
  • कनेक्टेड पार्टियां: 12,600 करोड़ रुपये ग्रुप से जुड़ी अन्य पार्टियों को भेज दिए गए।
  • रिलायंस इंफ्रा और 'C' कंपनी: सेबी (SEBI) की जानकारी के आधार पर ED ने पाया कि रिलायंस इंफ्रा ने एक अज्ञात संबंधित पार्टी 'C कंपनी' के जरिए करोड़ों रुपये डायवर्ट किए। यह कंपनी ऑडिट कमेटी और शेयरधारकों से छिपाई गई थी।
  • रिकवरी की जीरो संभावना: रिलायंस इंफ्रा ने करीब 5,480 करोड़ रुपये का नुकसान (Haircut) दिखाया है, जिसमें नकद वसूली केवल 4 करोड़ हुई है। बाकी रकम उन बिजली कंपनियों (Discoms) के नाम पर दिखाई गई है जो वर्षों से बंद पड़ी हैं।

यस बैंक और विदेशी संपत्ति की जांच

ED को जांच में पता चला है कि रिलायंस म्यूचुअल फंड ने यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,850 करोड़ रुपये निवेश किए थे। आरोप है कि यह जनता के पैसे का दुरुपयोग था और इसके बदले में कुछ अनुचित लाभ (Quid Pro Quo) लिया गया था। साथ ही, अनिल अंबानी के अघोषित विदेशी बैंक खातों और विदेशी संपत्तियों की भी सघन जांच की जा रही है।

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