रुपए में अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट, 28 पैसे गिरकर 71.02 का हुआ एक डॉलर
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नई दिल्ली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 71.02 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपए में गिरावट के पीछे ऑयल इम्पोर्टर्स को कारण माना जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दामों में तेजी भी इसके पीछे वजह मानी जा रही है जबकि अमेरिकी डॉलर की मजबूती वैश्विक स्तर पर अन्य देशों की करेंसी को कमजोर कर रही है।
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रुपया रोज रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा रहा है। आज भी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला और 71 के पार पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे की गिरावट के साथ 70.96 के स्तर पर खुला था जबकि कुछ देर बाद ही 28 पैसे गिरकर 71.02 के आंकड़े पर पहुंच गया। गुरुवार को 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 70.74 के स्तर पर बंद हुआ था।
मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 70.09 पर बंद हुआ था लेकिन बुधवार को रुपया पहली बार 70.50 के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा जबकि गुरुवार को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 70.74 पर बंद हुआ था। वहीं, शुक्रवार को रुपया और भी नीचे गिरकर 70.02 के स्तर पर जा पहुंचा है।
रुपए में गिरावट का पड़ेगा बड़ा असर
अगर रुपये में गिरावट का दौर जारी रहती है तो फिर विदेशी निवेशक भी शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल सकते हैं। इससे जिन लोगों ने बड़ी कंपनियों में अपना पैसा लगा रखा है, उनको नुकसान होगा। रुपये के कमजोर होने से अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसमें टेलीविजन, फ्रिज, डिजिटल कैमरा, डेस्कटॉप कंप्यूटर्स, लैपटॉप और अन्य सभी इलेक्ट्रानिक उत्पाद शामिल हैं।
देश में करीब लगभग 90 फीसदी से इससे ज्यादा खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, खाद्य तेल भी महंगे होगे। भारत करीब 1 एक लाख टन खाद्य तेल का हर साल आयात करता है।
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