गिरते रुपए का क्या होगा असर, खाने-पीने की चीजों से लेकर पेट्रोल-डीजल तक तोड़ेंगे कमर
नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 70.50 के स्तर के पार हो गया है। कारोबार के दौरान रुपया 45 पैसे टूटकर 70.55 के स्तर पर फिसल गया। यह रुपए का अबतक का सबसे निचला स्तर है। रुपए में गिरावट की वजह ऑयल इम्पोर्टर्स को माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में पिछले कुछ सेशन में तेजी देखने को मिल रही है। जिसका सीधा असर रुपए की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। बाजार एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई थी कि अगर रुपया 70 के पार पहुंच जाता है, तो आरबीआई के लिए इस स्थिति से निपटना काफी मुश्किल हो सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक, ऐसा मान जा रहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपया आज 70.11 से 70.68 की रेंज में ट्रेड कर सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि, रुपए की कीमतें गिरने से किन-किन क्षेत्रों पर असर देखने को मिलेगा।

पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी के दामों में इजाफा
1- डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के आयात पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड ऑयल खरीदता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से भारत को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेंगी। आयात महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। जिससे देश में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी के दामों में इजाफा हो सकता है।
2- देश में करीब लगभग 90 फीसदी से इससे ज्यादा खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, खाद्य तेल भी महंगे होगे। भारत करीब 1 एक लाख टन खाद्य तेल का हर साल आयात करता है।
3-रुपये के कमजोर होने से अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसमें टेलीविजन, फ्रिज, डिजिटल कैमरा, डेस्कटॉप कंप्यूटर्स, लैपटॉप और अन्य सभी इलेक्ट्रानिक उत्पाद शामिल हैं।

साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री पर पड़ेगा असर
4- वहीं अगर पेट्रोल के दामों बढ़ोत्तरी होती है, तो पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो जाएंगे। पेट्रोल की कीमतों का असर साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा। सभी पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ जाएंगे।
5-मारुति सुजुकी, टोयोटा, हुंडई समेत कई कार कंपनियां कुछ कल-पुर्जे विदेश से आयात करती हैं। ऐसे में कलपुर्जों का आयात महंगा होने से कारों की कीमत बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो कारें महंगी हो जाएंगी।
6-अगर रुपये में गिरावट का दौर जारी रहती है तो फिर विदेशी निवेशक भी शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल सकते हैं। इससे जिन लोगों ने बड़ी कंपनियों में अपना पैसा लगा रखा है, उनको नुकसान होगा। क्योंकि डॉलर खींचने के बाद कंपनियों के शेयर का दाम गिर जाएगा।

विदेश में पढ़ना हो जाएगा मंहगा
7- रुपए के कीमतों में अगर गिरावट होती है तो इसका सीधा असर विदेशों में पढ़ रहे बच्चों पर होगा। विदेश यात्रा करने वाले पर्यटकों या विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को भी कमजोर रुपया मुश्किल में डालता है। घूमने-फिरने का खर्च बढ़ जाता है और फीस के रूप में ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है।
8- ईंधन महंगा होगा तो आर्थिक गतिविधियों की लागत बढ़ेगी। ईंधन महंगा होने से चीजों के दाम बढ़ने लगते हैं यानी आरबीआई पर मुद्रास्फीति का दबाव पड़ने लगता है। महंगाई बढ़ी तो रिज़र्व बैंक (आरबीआई) को कर्ज महंगा करना पड़ सकता है।

कर्ज हो जाएगा मंहगा
8- ईंधन महंगा होगा तो आर्थिक गतिविधियों की लागत बढ़ेगी। ईंधन महंगा होने से चीजों के दाम बढ़ने लगते हैं यानी आरबीआई पर मुद्रास्फीति का दबाव पड़ने लगता है। महंगाई बढ़ी तो रिज़र्व बैंक (आरबीआई) को कर्ज महंगा करना पड़ सकता है।

रुपया गिरने से इन सेक्टर को होगा फायदा
9- रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई निर्यात आधारित है। डॉलर की मजबूती से यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों और फार्मा कंपनियों को फायदा होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स जो डॉलर में फ्यूल बेचती हैं उन्हें सीधा फायदा होगा।












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