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India Rupee Low: भारतीय मुद्रा पर मंडरा रहा संकट! डॉलर के मुकाबले हुआ कमजोर, जानें गिरावट के पीछे के कारण

India Rupee Low: भारतीय रुपया सोमवार (13 जनवरी 2025) को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.39 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 0.4% की गिरावट का सामना करते हुए अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर आ गया है। एशियाई मुद्राओं में गिरावट, मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इसके प्रमुख कारण रहे।

रुपये की मौजूदा गिरावट वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों का परिणाम है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में रुपया 88 प्रति डॉलर तक गिर सकता है। हालांकि, आरबीआई और सरकार की सक्रिय नीतियां इस गिरावट को धीमा कर सकती हैं। आइए रुपए की गिरावट के कारणों और आगे की स्थिति से आपको रूबरू कराएं...

India Rupee Low

रुपए में गिरावट के मुख्य कारण

1. मजबूत अमेरिकी आर्थिक डेटा

  • हाल ही में जारी अमेरिकी गैर-कृषि वेतन के आंकड़ों ने दिखाया कि पिछले महीने 256,000 नई नौकरियां बनीं, जो अपेक्षित 160,000 से कहीं अधिक है।
  • अमेरिकी सेवा और विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन ने डॉलर को और मजबूत किया।
  • इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना घट गई, जिससे डॉलर और सशक्त हुआ।

2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली

  • विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला।
  • पिछले तीन महीनों में 11 बिलियन डॉलर की निकासी के बाद, इस महीने भी 4 बिलियन डॉलर से अधिक की निकासी की गई है।
  • यह प्रवृत्ति रुपये पर दबाव बढ़ा रही है।

3. वैश्विक अस्थिरता और अनिश्चितता

  • अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव है।
  • उच्च हेजिंग गतिविधि और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने रुपये की कमजोरी को बढ़ा दिया है।

क्या रुपया और कमजोर हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये पर दबाव निकट भविष्य में जारी रह सकता है। आइए प्वाइंट्स में समझें...

1. आरईईआर (REER) का प्रभाव

  • वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) के अनुसार, रुपया लंबे समय तक अधिमूल्यित रहा है।
  • इसका अर्थ है कि रुपया अभी भी अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर है, और इसमें गिरावट की गुंजाइश बनी हुई है।

2. विशेषज्ञों का अनुमान

  • जेफरीज के ब्रैड बेचटेल का मानना है कि रुपया निकट भविष्य में 88 प्रति डॉलर तक कमजोर हो सकता है।
  • एएनजेड बैंक का अनुमान है कि मार्च 2025 तक यह स्तर संभव है।

3. फॉरेक्स बाजार में अस्थिरता

  • फेडरल रिजर्व की नीतियों में बदलाव और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव से रुपये में अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • विदेशी निवेशकों का भारत से धन निकालना भी रुपया कमजोर कर सकता है।

भारतीय मुद्रा के लिए भविष्य की चुनौतियां

  • वैश्विक आर्थिक स्थिति: अमेरिकी डॉलर की मजबूती से भारतीय मुद्रा को दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
  • आयात पर प्रभाव: कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से व्यापार घाटा और बढ़ सकता है।
  • विदेशी निवेश: अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी जारी रहती है, तो रुपया और कमजोर हो सकता है।

सरकार और आरबीआई का क्या रुख होगा?

  • आरबीआई को रुपये को स्थिर करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करना पड़ सकता है।
  • सरकार आयात-निर्यात असंतुलन को नियंत्रित करने के उपायों पर काम कर सकती है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधारों की भी आवश्यकता हो सकती है।

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नोट - यह लेख पूरी तरह है एक्पर्स्ट्स की राय पर आधारित है। वन इंडिया इसके लिए उत्तरदायी नहीं।

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