India February WPI: फरवरी 2023 में मध्यम रही थोक मुद्रास्फीति, पिछले महीने की तुलना में गिरावट

India February WPI (थोक मूल्य सूचकांक) के आंकड़े सामने आने के बाद सरकार ने कहा, भारत में थोक मुद्रास्फीति फरवरी 2023 में मध्यम बनी रही। थोक मुद्रास्फीति 3.85 प्रतिशत (अनंतिम) रही, जबकि पिछले महीने यह 4.73 प्रतिशत थी।

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India February WPI महंगाई से राहत मिलने के लिहाज से थोड़ी राहत भरी तस्वीर दिखा रहा है। फरवरी 2023 में थोक मुद्रास्फीति मध्यम रहने के कारण मुद्रास्फीति में एक बार फिर गिरावट देखी गई है। पिछले कई महीने से इन्फ्लेशन लगातार कम हो रहा है।

अक्टूबर में थोक महंगाई दर 8.39 थी और तब से लगातार इसमें गिरावट आ रही है। विशेष रूप से, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति सितंबर तक लगातार 18 महीनों तक दोहरे अंकों में रही थी। इसके बाद लगातार गिरावट देखी जा रही है। WPI आधारित भारत में थोक मुद्रास्फीति फरवरी 2023 में मध्यम बनी रही और 3.85 प्रतिशत (अनंतिम) रही, जबकि पिछले महीने यह 4.73 प्रतिशत थी।

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    इस बीच सरकारी आंकड़ों के आधार पर समाचार एजेंसी ANI ने बताया, कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, भले ही भारत में खुदरा मुद्रास्फीति मामूली रूप से गिरी, लेकिन फरवरी 2023 में भी आंकड़े रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता बैंड से ऊपर रही। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 6.44 प्रतिशत रहा।

    ग्रामीण और शहरी भारत में खुदरा मुद्रास्फीति क्रमशः 6.72 प्रतिशत और 6.1 प्रतिशत रही। रिटेल इन्फ्लेशन छह फीसद से अधिक बने रहने में अनाज और उत्पाद, फलों की कीमतों में उछाल अहम कारण रहे। इन कीमतों के कारण फरवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी। इसके अलावा, फरवरी में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक 5.95 प्रतिशत था, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है। सब्जियों की खुदरा महंगाई दर घटकर 11.61 फीसदी रही। जनवरी में खुदरा महंगाई दर 6.52 फीसदी थी।

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    भारत की खुदरा मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों में आरबीआई के 6 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रही। सिर्फ नवंबर 2022 में रिटेल इन्फ्लेशन आरबीआई के दायरे में रही थी। लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे के तहत, यदि सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक 2-6 प्रतिशत की सीमा से बाहर रहे, तो आरबीआई को मूल्य वृद्धि के प्रबंधन में विफल माना जाता है।

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    पिछले साल मई से, आरबीआई ने मुद्रास्फीति को कम करने के लिए नवीनतम 25 बीपीएस बढ़ोतरी सहित अल्पकालिक उधार दर में 250 आधार अंकों की वृद्धि की है। रेपो दर बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में मांग घटाने में मदद मिलती है। इससे मुद्रास्फीति के प्रबंधिन में मदद मिलती है। यह भी रोचक है कि ब्याज दरें बढ़ाना एक मौद्रिक नीति साधन है जो आम तौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करता है, जिससे मुद्रास्फीति की दर में गिरावट आती है।

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