'2023-24 में भारत की इकोनॉमी 7.3% बढ़ने की उम्मीद', सरकार का अनुमान
मार्च में समाप्त होने वाले चालू फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। यह अनुमान नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस (एनएसओ) ने शुक्रवार को व्यक्त किया है।
एनएसओ ने एक बयान में कहा कि यह ग्लोबल इकोनॉमी की हाईएस्ट रेट है। जिसे राज्य के खर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में 2023-24 के लिए देश की ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया था।

आंकड़ों में समझें...
इससे पहले के फाइनेंशियल ईयर पर नजर डालें तो, भारत की अर्थव्यवस्था 2022/23 में 7.2 फीसदी और 2021/22 में 8.7 फीसदी बढ़ी। मैन्युफैक्चरिंग, जो जीडीपी का लगभग 17 फीसदी है। 2023/24 में साल-दर-साल 6.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। जबकि एक साल पहले यह 1.3 फीसदी था, जबकि निर्माण उत्पादन में 10.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी।
आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले वर्ष में यह 10 फीसदी से अधिक है। हालांकि, जीडीपी में लगभग 15 फीसदी का योगदान देने वाले कृषि उत्पादन में वृद्धि चालू फाइनेंशियल ईयर में घटकर 1.8 फीसदी हो गई, जो पिछले साल में 4 प्रतिशत थी, जिससे ग्रामीण मजदूरी पर असर पड़ा।
पिछली तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि के बाद, भारत ने सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 7.6 फीसदी की उम्मीद से अधिक तेज आर्थिक वृद्धि दर्ज की, जिसने कई निजी अर्थशास्त्रियों को अपने वार्षिक अनुमानों को संशोधित करने के लिए प्रेरित किया।
1 फरवरी को अंतरिम वार्षिक बजट पेश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अंतरिम वार्षिक बजट पेश करेंग। चालू फाइनेंशियल ईयर में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.9 फीसदी से कम करने का लक्ष्य रखते हुए कर प्राप्तियों में वृद्धि से बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की उम्मीद है।












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