Income Tax रिटर्न: फाइल में भारतीयों की संख्या बढ़ी, अधिकांश लोग पैसे नहीं देते, सिर्फ 1.2 फीसद भरते हैं आयकर
Income Tax रिटर्न फाइल करने के मामले में भारतीय लोगों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, केवल 1-2% आबादी ही वास्तव में आयकर का भुगतान करती है। सरकारी डेटा के अनुसार 1-2 प्रतिशत आयकर कुल कर संग्रह का 27 प्रतिशत है।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 2019-20 से 2022-23 की अवधि में आयकर अनुपालन में वृद्धि हुई है। टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, बड़ा हिस्सा जीरो IRT फाइल करने वाले लोगों की है।

2019-20 और 2022-23 के बीच आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों की संख्या में 3.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि औसत वृद्धि हुई है। रिटर्न दाखिल करने वाले ऐसे लोग जिन्हें कोई पैसे नहीं देने पड़ते, उनकी संख्या में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
2022-23 में 7.4 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया, जिनमें से 5.16 करोड़ लोगों या 70 प्रतिशत पर शून्य कर देनदारी थी। इसका मतलब है कि 2022-23 में केवल 2.24 करोड़ लोगों ने आयकर का भुगतान किया, जो भारत की कुल आबादी का लगभग 1.6 प्रतिशत है।
टैक्स से जुड़े मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि कुल ITR का केवल एक छोटा सा हिस्सा वास्तव में आयकर का भुगतान करती है। सरकार ने पिछले कुछ दिनों में दाखिल रिटर्न की संख्या, व्यक्तियों और कॉरपोरेट्स सहित करदाताओं की संख्या और ईपीएफओ सदस्यता पर डेटा जारी किया है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए जाने पर दिप्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, क्लीयर (पुराना नाम क्लीयरटैक्स) के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने बताया, आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की केवल 1-2 प्रतिशत आबादी ही वास्तव में आयकर का भुगतान करती है।
सरकार ने 2022-23 के लिए अपने संशोधित अनुमान जारी किया है। इसके अनुसार, केवल 1-2 प्रतिशत टैक्स देने भारत के कुल कर संग्रह का लगभग 27 प्रतिशत है। इसका मतलब यह नहीं है कि केवल 1-2 प्रतिशत भारतीय ही कोई कर चुकाते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), जिसके 2022-23 में भारत के कुल कर संग्रह का लगभग 28 प्रतिशत होने का अनुमान है। GST का भुगतान खरीदारी करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
अनुपालन को बढ़ावा
'आयकर दिवस' पर एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा, "कर दरों में कोई वृद्धि नहीं होने के बावजूद हाल के वर्षों में सरकार का प्रत्यक्ष कर संग्रह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "यह (आयकर) विभाग की दक्षता में वृद्धि के माध्यम से संभव हुआ है।"
भारत में इनकम टैक्स रिटर्न पर विशेषज्ञों का भी मानना है कि सरकार ने कर अनुपालन बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें जीएसटी के तहत अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का बेहतर उपयोग करना भी शामिल है।
अर्चित गुप्ता के मुताबिक, "सरकार ने लोगों को रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित करके अनुपालन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, भले ही उन्हें साल के अंत में कर का भुगतान न करना पड़े।"
गुप्ता के अनुसार, "इनमें वे लोग शामिल हैं जिनकी आय कर-भुगतान सीमा से कम है लेकिन जिनका रिफंड बकाया है।" उन्होंने कहा, "जो लोग रिफंड के पात्र हैं, उन्हें रिफंड तभी मिल सकता है, जब वे ऑनलाइन रिटर्न फाइल करेंगे।"
अधिक लोग टैक्स भरें, इसके लिए कुछ अन्य सरकारी उपायों में यह अनिवार्य करना भी शामिल है कि रिटर्न दाखिल नहीं करने वालों के लिए टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की दर अधिक होगी। सामान्य तौर पर, सरकार ने लोगों को रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए टीडीएस तंत्र का उपयोग किया है।
बता दें कि लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री सीतारमण ने भी बताया कि टीडीएस और स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) का दायरा बढ़ाया गया है। अब कई लेनदेन ऐसे हैं जिन पर टैक्स अधिक लगेगा। इनमें "भारी मात्रा में नकदी निकासी, विदेशी पैसे भेजना, लक्जरी कार की खरीद, ई-कॉमर्स की भागीदारी, माल की बिक्री, अचल संपत्ति का अधिग्रहण, विदेशी घूमने का ट्रैवल प्लान खरीदना, वर्चुअल डिजिटल संपत्ति को ट्रांसफर करना, ऑनलाइन गेम में जीता गया नेट अमाउंट और निवासी को भुगतान किए गए सूचीबद्ध डिबेंचर पर ब्याज" प्रमुख हैं।
टैक्स रिटर्न दाखिल करने में उच्च अनुपालन का एक अन्य कारण जीएसटी डेटा का उपयोग है। इस पर एमएस डेलॉइट इंडिया में अप्रत्यक्ष कर के वरिष्ठ निदेशक मणि के हवाले से दि प्रिंट ने बताया, रिटर्न दाखिल करने के इस दबाव का मतलब है कि सरकार भी बहुत अधिक आयकर रिफंड का भुगतान कर रही है।
उन्होंने कहा, भले ही लोग अपनी आय पर टीडीएस या टीसीएस का भुगतान करते हैं, हो सकता है कि उन्होंने पूरे वर्ष कर-बचत निवेश का उपयोग किया हो, जिससे उनकी आय कम हो जाती है। ऐसे में टैक्स भुगतान जीरो हो जाता है।
3 अप्रैल, 2023 को जारी 2022-23 के लिए सरकार के नवीनतम प्रत्यक्ष कर संग्रह डेटा से पता चलता है कि पिछले वर्ष की तुलना में उस वर्ष आयकर रिफंड में 37.4 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।
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