फ्लाइट टिकट के दाम में बड़ी गिरावट, बस-ट्रेन से भी सस्ती हवाई यात्रा, सिर्फ 1100 रुपए में करिए विमान में सफर
नई दिल्ली, 06 सितंबर। जेट फ्यूल के दाम में जिस तरह से पिछले कुछ समय में बेतहशा बढ़ोत्तरी देखने को मिली उसकी वजह से विमान में सफर करना लगातार महंगा हो रहा था। विमान के टिकटों के दाम काफी ज्यादा बढ़ गए थे। लेकिन अब एक बार फिर से विमान के टिकटों की कीमतें तेजी से कम हो रही हैं। सरकार ने किराए की सीमा को समाप्त कर दिया, जिसके बाद कई घरेलू विमान कंपनियों ने अपने टिकटों के दाम में गिरावट की है। इसमे अकासा एयर, इंडिगो, एयर एशिया, गो फर्स्ट और विस्तार जैसी कंपनियां मुख्य रूप से शामिल हैं।

मुंबई-बेंगलुरू सिर्फ 2000 रुपए में
अकासा ने विमान के टिकटों की कीमत में तकरीबन हर रूट पर दाम किए हैं। मुंबई से बेंगलुरू का टिकट अकासा एयरलाइंस सिर्फ 2000-2200 रुपए में उपलब्ध है। जबकि मुंबई से अहमदाबाद के बीच विमान के टिकट के दाम तकरीबन 1400 रुपए तक हो गए हैं। अगस्त माह की बात करें तो इसी रूट के दाम तकरीबन 3948 रुपए से लेकर 5008 रुपए तक पहुंच गए थे।

काफी कम हुए टिकटों के दाम
देश की सबसे बड़ी घरेलू विमान कंपनी इंडिया के विमान के टिकट भी अकासा एयरलाइंस के तकरीबन बराबर आ गए हैं। दोनों ही रूट पर दोनों ही विमान कंपनियों के टिकट तकरीबन बराबर हैं। वहीं गो फर्स्ट की बात करें तो इसने भी अपने टिकटों के दाम में बड़ी गिरावट की है। दिल्ली से लखनऊ के बीच विमान के टिकट की बात करें तो पिछले कुछ दिनों में इसकी कीमतों में भी गिरावट हुई है। अब दिल्ली से लखनऊ के बीच एयर एशिया विमान व इंडिगो का टिकट 1900 से 2200 रुपए के बीच है। इससे पहले इस रूट का सबसे सस्ता किराया 3500-4000 के बीच था।

इन शहरों के बीच टिकट सिर्फ 1100 रुपए
कोच्चि से बेंगलूरू के बीच विमान के टिकटों की बात करें तो यह 1100-1300 रुपए के बीच मिल रहा है। गो फर्स्ट, इंडिगो, एयर एशिया के टिकटों में इस रूट के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली है। मुंबई जयपुर के बीच विमान का टिकट पहले 5000-5500 रुपए के बीच था जोकि कम होकर 3900 रुपए हो गया है। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि नई कीमतें की बड़ी वजह है कि भारत में प्रतिस्पर्धा है। एविएशन इंडस्ट्री के लिए यह सकारात्मक खबर है।

प्रतिस्पर्धा के चलते कम हो रहे दाम
एक्सपर्ट की मानें तो टिकटों के दाम में गिरावट की वजह सिर्फ अधिक से अधिक टिकटों की बुकिंग नहीं है बल्कि , लोगों की बढ़ती मांग, प्रतिस्पर्था, सप्लाई आदि भी है। इस तरह की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच जो भी कमजोर कड़ी होगी वह बाहर हो जाएगी। लेकिन अगर हर कोई बाजार में लंबा टिका रहना चाहता है तो उसे अपना मुनाफा कम करना होगा। वरिष्ठ एयरलाइंस अधिकारियों का कहना है कि भारत में घरेलू विमान की मांग में कमी भी एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से कीमतों में गिरावट की गई है। जुलाई-सितंबर तिमाही में विमान के टिकटों की मांग काफी कम हुई थी।

त्योहार में थोड़े बढ़ सकते हैं दाम
एक्सपर्ट का कहना है कि आगामी त्योहार के मौसम के चलते दाम में थोड़ी बढ़ोत्तरी की जा सकती है, लेकिन माना जा रहा है कि पहले की तुलना में ये फिर भी कम रहेगी। एक घरेलू एयरलाइंस कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कॉर्पोरेट ट्रैवल की वापसी की वजह से एयरलाइंस कंपनियों ने टिकट के दामों में गिरावट करने का फैसला लिया है। पिछले कुछ महीनों से यात्रियों का दबाव बढ़ा है, जोकि सकारात्मक पहलू है, जिसकी वजह से एयरलाइंस कंपनियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।

नई नीति से होगा फायदा
मई 2020 की बात करें तो सरकार ने घरेलू विमान के टिकटों की कीमतों की एक सीमा को तय कर दिया था, जिससे कि विमानों के टिकट के दाम बहुत अधिक ना बढ़ें। सरकार ने हाल ही में इस बात की घोषणा की है कि अगस्त 2022 के बात इस सीमा को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। पिछले हफ्ते तकरीबन 2 साल के उच्चतम स्तर पर जेल ईंधन के दाम पहुंच गए थे। जिसके बाद एयरलाइंस कंपनियां एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में गिरावट की अपेक्षा कर रहे थे।

मेट्रो शहरों को मिलेगा ज्यादा लाभ
अधिकारी ने बताया कि एटीएफ के दाम में गिरावट से ना सिर्फ एयरलाइंस कंपनियों को मदद मिलेगी बल्कि ग्राहकों को भी इसका फायदा सस्ती टिकटों के रूप में होगा। मेट्रो रूट पर टिकटों के दाम में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिल सकती है। दिल्ली मुंबई जैसे शहरों के बीच टिकटों के दाम काफी गिर सकते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक लाभ होगा और कम कीमत पर वह हवाई यात्रा कर सकते हैं।












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