हिंडनबर्ग के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पा रहे अडानी, अटक गई 400 करोड़ रुपये की डील
Adani vs Hindenburg: अडानी समूह के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) कंपनी एयर वर्क्स के प्रस्तावित अधिग्रहण में देरी होने के बाद अब डील की अंतिम तारीख भी निकल गई है। अडानी समूह के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
अडानी समूह भले हो तेजी से उबरने का दावा कर रहा हो लेकिन हिंडनबर्ग की चोट का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। कंपनी को कई डील से जहां हाथ धोना पड़ रहा है वहीं कई सौदे अटक रहे हैं। हिंडनबर्ग द्वारा अडानी ग्रुप पर आरोप लगाने के चलते कंपनी की विश्वसनीयता भी कम हो गई है।
400 करोड़ रुपये की डील अटकी
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हिंडनबर्ग के आरोप के बाद से अडानी समूह काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है लेकिन संभल नहीं पा रहा है। अब अडानी के अटके सौदों में नया नाम जुड़ा है एअरक्राफ्ट मेंटनेंस कंपनी एअर वर्क्स (Air Works) के साथ होने वाले प्रस्तावित सौदे का। अडानी समूह ने एअर वर्क्स को 53 मिलियन डॉलर यानी करीब 400 करोड़ रुपये में खरीदने की योजना तैयार की थी। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई थी। इसके लिए तारीख भी तय हुई थी लेकिन आखिर वक्त तक फाइनल डील नहीं हो सकी और डेडलाइन भी खत्म हो गई।

क्या काम करता है एयर वर्क्स ग्रुप (Air Works Group)
बता दें कि एयर वर्क्स ग्रुप का 27 शहरों में सबसे बड़ा पैन इंडिया नेटवर्क है। इसकी स्थापना 1951 में हुई थी। Air Works कंपनी प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस प्लेटफार्मों के लिए देश के भीतर व्यापक परिचालन क्षमता विकसित की है। यह कंपनी भारतीय वायुसेना समेत कई अन्य कंपनियों के विमानों के रखरखाव का काम करता है।
24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप पर लगाए थे आरोप
आपको बता दें कि 24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ग्रुप की शेयर बाजार में लिस्टेड अहम कंपनियों पर काफी कर्ज है। इसमें कहा गया है कि अडानी ग्रुप अपनी उन स्कीमों को प्रमोट करके शेयर मार्केट को कंट्रोल कर रही थी जो फ्रॉड है। इस रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की कंपनियों को 85 फीसदी से ज्यादा ओवरवैल्यूड भी बताया गया है और बताया गया है कि इनकी वजह से ही ग्रुप पर संकट है।
अडानी ग्रुप पर लगे थे कई गंभीर आरोप
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया कि अडानी ग्रुप की कंपनियां कई वर्षों से स्टॉक हेरफेर में गड़बड़ी कर रही हैं। जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और करप्शन जैसे आरोप लगे थे। अडानी परिवार के सदस्यों पर कथित तौर पर टैक्स हेवेन, जैसे- मॉरिशस, यूएई, कैरिबियाई द्वीपसमूहों में फर्जी कंपनियां खोलने के भी आरोप हैं। हालांकि, अडानी समूह ने इसे पूरी तरह से भ्रामक रिपोर्ट करार दिया है और इस रिपोर्ट को झूठ का पुलिंदा बताया है। अडानी ग्रुप का कहना है कि यह उसे बदनाम करने की साजिश है।












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