जानिए आखिर क्यों गिर रहा शेयर बाजार, आने वाले दिन होने वाले हैं और भी चुनौतीपूर्ण

मुंबई, 06 मई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अचानक से जिस तरह से ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की उसकी वजह से बाजार में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि बाजार में इस तरह की गिरावट देखने को मिलेगी। शेयर बाजार में एलआईसी के आईपीओ के आने के बाद माना जा रहा था कि बाजार में अच्छी बढ़त देखने को मिलेगी। यहां तक कि सरकार भी यह चाहती थी कि जब एलआईसी का आईपीओ लिस्ट हो तो बाजार का मूड अच्छा हो, लेकिन जिस तरह से बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली उसने हर किसी को चौंका दिया। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्यों आरबीआई ने अचानक से ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला लिया।

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चार साल में पहली बड़ी बढ़ोत्तरी
ऐसे में जब खुद सरकार चाहती है कि एलआईसी के आईपीओ के लिस्ट होने के समय बाजार का मूड अच्छा हो तो आरबीआई ने क्यों ने ब्याज दरों को बढ़ा दिया। यह बात बिल्कुल साफ है कि रिजर्व बैंक के पास निश्चित रूप से कुछ ऐसे आंकड़े जरूर रहे होंगे जिसके चलते ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ा। गौर करने वाली बात है कि आरबीआई ने बैंक रेट को 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ा दिया गया, जबकि सीआरआर को 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ा दिया गया। पिछले चार साल में पहली बार आरबीआई ने ब्याज दर को बढ़ाया है।

क्या है बैंक रेट
यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर ब्याज दरों को आरबीआई बढ़ाता है तो ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी होती है, इसकी बड़ी वजह है कि जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आरबीआई से महंगी दर पर पैसे लेगा तो निश्चित तौर पर बैंक ग्राहकों को बढ़ी हुई ब्याज दर पर पैसा देगा। जिसके चलते अर्थव्यवस्था में लिक्विडिटी को कम किया जा सके और महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। वहीं जब रिजर्व बैंक ब्याज दरों को कम करता है तो बैंक कम ब्याज दर पर ग्राहकों को लोन देता है। जिसके चलते अधिक संख्या में लोग लोन लेते हैं और बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है।

ब्याज दर बढ़ने का बाजार में असर
ऐसे में स्पष्ट है कि जब भी बाजार में लिक्विडिटी यानि पैसे प्रवाह को नियंत्रित करना होता है तो आरबीआई ब्याज दर को बढ़ाता है, जिससे बैंक से लोन लेने के लिए अधिक ब्याज देना होता है। ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी होने से देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। आम लोग घर के लिए लोन, व्यापार के लिए लोन लेने से परहेज करते हैं। व्यापार पर इसका सीधा असर होता है, कंपनियां और व्यापारी लोन लेने से कतराते हैं। लिहाजा ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी से ना सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ता है बल्कि विकास दर भी प्रभावित होती है। ऐसे में स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास ऐसे आंकड़े जरूर होंगे जिसके चलते मजबूरन आरबीआई को ब्याज दरों को बढ़ाना पड़ा।

महंगाई नियंत्रित रखना और विकास दर को बढ़ाने की चुनौती
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास सबसे मुश्किल चुनौती महंगाई दर पर नियंत्रण रखना और विकास दर को बढ़ाना होता है। दोनों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाना हमेशा से आरबीआई के सामने चुनौती होती है। एक तरफ जहां आरबीआई को देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सपोर्ट देने की जरूरत होती है तो दूसरी तरफ महंगाई दरें आसमान में ना पहुंचे इसपर भी नियंत्रण रखना होता है। लिहाजा बाजार में सही मात्रा में लिक्विडिटी को बनाए रखना आरबीआई के सामने सबसे मुश्किल चुनौती होती है।

सीआरआर में बढ़ोत्तरी
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट के अलावा सीआरआर में भी बढ़ोत्तरी की ही। सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की गई है। सीआरआर यानि कैश रिजर्व रेशियो वो होता है जिसमे बैंकों को एक निश्चित राशि रिजर्व बैंक के पास सुरक्षित रखना होता है। यानि अगर बैंक को अधिक पैसे रिजर्व बैंक के पास रिजर्व में रखने होंगे तो बैंकों की कैपिटल में कमी होगी और बैंक की लोन देने की क्षमता पर इसका असर होगा। यानि रिजर्व बैंक ने दोहरा मापदंड अपनाया है, जिससे कि बाजार में लिक्विडिटी को कम किया जा सके।

बड़ी मंदी के संकेत
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सिर्फ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ही नहीं बल्कि अमेरिका, यूके के बैंकों ने भी ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की है। अमेरिका में यूएस बैंक ने ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की है, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की है, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने भी ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोत्तरी की है। अमेरिका में ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोत्तरी की संकेत दिए गए हैं, ऐसे में साफ है कि महंगाई की बड़ी मार ना सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में आने जा रही है। जिस तरह से बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मुश्किल फैसले ले रहा है, उससे साफ है आने वाले समय में हालात और भी मुश्किल बढ़ सकती है।

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