बजट 2017: इनकम टैक्‍स में मिलेगी छूट या फिर करना होगा लंबा इंतजार

स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार 1 फरवरी, 2017 को वित्‍त वर्ष 2017-18 का बजट पेश किया जाएगा। इस साल बजट की खासियत होगी कि रेल बजट को अलग से पेश नहीं किया जाएगा।

नई दिल्‍ली। स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार 1 फरवरी, 2017 को वित्‍त वर्ष 2017-18 का बजट पेश किया जाएगा। इस साल बजट की खासियत होगी कि रेल बजट को अलग से पेश नहीं किया जाएगा। पिछले साल 8 नवंबर, 2016 को देश में विमुद्रीकरण का फैसला लागू करने के बाद सरकार के लिए यह बजट पेश करना एक चुनौती से कम नहीं है। क्‍योंकि चुनाव आयोग भी केंद्र सरकार को यह सलाह दे चुका है कि बजट पेश करने के दौरान इस बात का ध्‍यान रखें कि जिन राज्‍यों में चुनाव होने हैं , वहां के लिए कोई विशेष घोषणाएं न की जाएं। ऐसे में सभी की उम्‍मीदों को पूरा करने वाला बजट पेश करने से सरकार भी बचेगी।

बजट 2017: इनकम टैक्‍स में मिलेगी छूट या फिर करना होगा लंबा इंतजार

इस बार 1 फरवरी, 2017 को पेश होने वाले बजट में उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इस बार इनकम टैक्‍स में छूट दे सकती है। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली भी कई बार पत्रकारों के साथ दबी जुबान में इस तरफ इशारा कर चुके हैं। वित्‍त वर्ष 2017-18 के बजट में केंद्र सरकार इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव करती है। पहले कहा जा रहा था कि सरकार टैक्‍स स्‍लैब को 2.50 लाख से बढ़ाकर 4 लाख कर देगी। पर अब माना जा रहा है कि सरकार 3 लाख या 3.50 लाख रुपए बजट स्‍लैब को निर्धारित कर सकती है। अभी देश में 2.50 लाख से ज्‍यादा सालाना आय वालों को टैक्‍स देना पड़ता है।

बीते सोमवार को भारतीय स्‍टेट बैंक की रिपोर्ट ईकोरप के मुताबिक विमुद्रीकरण के फैसले के बाद अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी लाने के लिए इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव कर सकती है। साथ ही कम अवधि के लिए जमा राशि पर टैक्‍स छूट दी जा सकती है। एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में टैक्‍स स्‍लैब को 3 लाख और 4 लाख दोनों तक किए जाने की बात कही है। पर सरकार को बजट में दूसरे वर्गों को ध्‍यान में रखकर ही फैसला करेगी। विमुद्रीकरण के फैसल के बाद डिजिटल पेमेंट में लोगों को अप्रत्‍यक्ष रूप से कर देना पड़ रहा है। इसको ध्‍यान में रखते हुए भी सरकार ग्राहकों को छूट देने का फैसला करती है। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि देश में अब जिंदगी को सामान्‍य तरह से जीने की लागत भी बढ़ चुकी है। इसलिए सरकार ऐसा फैसला कर सकती है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा सैलरी व्‍यक्ति के हाथ में आ सके।

इस समय देश में तीन टैक्‍स स्‍लैब लागू हैं। इन टैक्‍स स्‍लैब के अनुसार 2.50 लाख तक वार्षिक आय वाले को कोई भी टैक्‍स नहीं देना पड़ता है। वहीं 2.50 लाख से 5 लाख रुपए तक वालों को 10 फीसदी, 5 लाख से 10 लाख रुपए वार्षिक आय वालों को 20 फीसदी और 10 लाख रुपए से अधिक आय वालों को 30 फीसदी टैक्‍स देना पड़ता है।

क्‍योंकि अगले साल 1 जुलाई 2017 से देश भर में जीएसटी लागू करने की बात सरकार ने कही है। इसलिए सर्विस टैक्‍स से संबंधित घोषणा भी सरकार टैक्‍स में कर सकती है। देश में अधिकतर सेवाएं लेने के लिए ग्राहकों को अप्रत्‍यक्ष तौर पर सर्विस टैक्‍स चुकाना पड़ता है। सर्विस टैक्‍स की दर करीबन 15 फीसदी तक है।

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